बंगाली सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री का निधन, पर्दे से अचानक गायब हुईं, फिर कभी नहीं लौटीं ये एक्ट्रेस

बंगाली सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री मिथु मुखर्जी का 71 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। करीब एक साल से कैंसर से जूझ रहीं अभिनेत्री ने 1972 में फिल्मी करियर शुरू किया था। बंगाली फिल्मों के साथ उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी काम किया और 1990 में आखिरी बार पर्दे पर नजर आई थीं।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 21 September 2026, 3:00 PM IST
google-preferred

Mumbai: बंगाली सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री मिथु मुखर्जी का रविवार रात मुंबई के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 71 साल की थीं और करीब एक साल से कैंसर का इलाज करा रही थीं। 1970 और 1980 के दशक में बंगाली सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल रहीं मिथु मुखर्जी ने बंगाली के साथ हिंदी फिल्मों में भी काम किया था। उनके निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है।

17 साल की उम्र में शुरू किया फिल्मी सफर

कोलकाता में 1955 में जन्मीं मिथु मुखर्जी ने महज 17 साल की उम्र में फिल्मों में कदम रखा था। साल 1972 में उन्होंने चित्त बोस की फिल्म 'शेष पर्व' से अपना फिल्मी सफर शुरू किया। इस फिल्म में वह शमित भंजा के साथ नजर आई थीं। इसके बाद दिनेन गुप्ता की 'मरजीना अब्दुल्ला' ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई। इस फिल्म में उन्होंने देबराज रॉय के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी।

बंगाली सिनेमा में बनाई खास पहचान

'मरजीना अब्दुल्ला' के बाद मिथु मुखर्जी ने कई चर्चित बंगाली फिल्मों में काम किया। इनमें 'निशिकन्या', 'मौचाक', 'कवि', 'होटल स्नो फॉक्स', 'प्रतिमा', 'बंधन', 'प्रार्थना' और 'स्वयंसिद्धा' जैसी फिल्में शामिल हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय ने उन्हें उस दौर के बंगाली सिनेमा के पहचाने जाने वाले चेहरों में शामिल कर दिया था। उन्होंने उत्तम कुमार, सौमित्र चटर्जी और रंजीत मल्लिक जैसे कलाकारों के साथ भी काम किया।

हिंदी फिल्मों में भी दिखाया अभिनय का दम

मिथु मुखर्जी ने बंगाली फिल्मों के साथ हिंदी सिनेमा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। साल 1976 में उन्होंने दुलाल गुहा की 'खान दोस्त' से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया। इसके बाद वह बासु चटर्जी की 'सफेद झूठ' में नजर आईं। 'दिललगी' और 'दो लड़के दोनों कड़के' जैसी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया।

खिड़की से अचानक आने लगी सीटी और चटकने की आवाज? कहीं ये बड़ी समस्या का संकेत तो नहीं

1990 में आई आखिरी फिल्म, फिर लाइमलाइट से बनाई दूरी

1980 के दशक में 'दुजाने' में काम करने के बाद मिथु मुखर्जी ने अभिनय से ब्रेक लिया। इसके बाद 1990 में चंद्र बरोट की फिल्म 'आश्रिता' से उन्होंने पर्दे पर वापसी की। यही उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई। 'आश्रिता' के बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली और धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन से भी दूर होती चली गईं।

लंबे समय से थीं लाइमलाइट से दूर

फिल्मों से दूरी बनाने के बाद मिथु मुखर्जी ने बेहद निजी जिंदगी जी। बाद के वर्षों में वह सार्वजनिक कार्यक्रमों और मीडिया की नजरों से काफी दूर रहीं। अब उनके निधन के बाद उनके लंबे फिल्मी सफर और यादगार फिल्मों को एक बार फिर याद किया जा रहा है।

Location :  Mumbai

Published :  21 September 2026, 3:00 PM IST

Related News

Advertisement