“आपका सिस्टम हैक हो गया है” कहकर लूटते थे पैसे, नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़

नोएडा के सेक्टर-16 में साइबर क्राइम पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह विदेशी नागरिकों को टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर ठगता था और करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 9 April 2026, 7:34 PM IST
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Noida: नोएडा की चमकती इमारतों के बीच एक ऐसा अंधेरा खेल चल रहा था, जहां आवाजें मदद की नहीं, ठगी की थीं। स्क्रीन के उस पार बैठे लोग खुद को “टेक्निकल एक्सपर्ट” बताते थे, लेकिन असल में वे डिजिटल दुनिया के शातिर शिकारी थे। एक कॉल, एक डर और कुछ ही मिनटों में खाते खाली- यही था इस हाईटेक गैंग का तरीका। लेकिन अब इस खेल का पर्दा उठ चुका है।

सेक्टर-16 में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा

नोएडा के सेक्टर-16 में साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर ऑनलाइन ठगी करते थे। मौके से पुलिस ने 4 लैपटॉप, 15 डेस्कटॉप, 15 मॉनिटर, 16 मोबाइल फोन, हेडफोन, राउटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।

कैसे चलता था ठगी का पूरा खेल

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी इंटरनेट और सोशल मीडिया पर पेड विज्ञापन चलाते थे। इन विज्ञापनों में टोल-फ्री नंबर दिए जाते थे, जिन पर कॉल करने वाले सीधे इनके सिस्टम से जुड़ जाते थे। इसके बाद आरोपी खुद को टेक्निकल सपोर्ट एजेंट बताकर लोगों को डराते थे कि उनका कंप्यूटर या मोबाइल हैक हो गया है। यह डर ही उनके पूरे खेल की सबसे बड़ी ताकत था।

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स्क्रीन शेयरिंग से खाते तक पहुंच

जब पीड़ित घबरा जाता था, तो आरोपी स्क्रीन शेयरिंग के जरिए उसके सिस्टम तक पहुंच बना लेते थे। इसके बाद वे बैंकिंग डिटेल्स निकाल लेते थे और पैसे ट्रांसफर कर लेते थे। लोगों को भ्रमित करने के लिए आरोपी उनकी स्क्रीन ब्लैक कर देते थे, जिससे उन्हें लगता था कि उनका सिस्टम पूरी तरह हैक हो चुका है। इसी डर में लोग ठगी का शिकार हो जाते थे।

रकम तय करने का भी था तरीका

पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी पीड़ित के बैंक खाते में मौजूद रकम देखकर ठगी की राशि तय करते थे। अगर खाते में कम पैसे होते थे तो 100 से 500 डॉलर तक वसूले जाते थे, जबकि ज्यादा रकम होने पर कॉल को सीनियर के पास ट्रांसफर कर दिया जाता था, जो बड़ी ठगी को अंजाम देते थे।

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क्रिप्टो और हवाला से होता था लेन-देन

ठगी से कमाए गए पैसे को आरोपी सीधे बैंक में नहीं रखते थे। वे क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क के जरिए पैसे हासिल करते थे, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाए। पुलिस को शुरुआती जांच में ही करोड़ों रुपये के लेन-देन के सबूत मिले हैं, जिससे इस गिरोह के बड़े नेटवर्क का अंदाजा लगाया जा रहा है।

Location :  Noida

Published :  9 April 2026, 7:34 PM IST

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