राम मंदिर दान विवाद: एफआईआर से पहले हुई पूछताछ पर सवाल, नकदी के बाद जेवरातों के रिकॉर्ड की भी जांच

राम मंदिर दान राशि में कथित गड़बड़ी के मामले में एसआईटी जांच लगातार आगे बढ़ रही है। एफआईआर दर्ज न होने, संदिग्धों से पूछताछ और चढ़ावे के जेवरातों के रिकॉर्ड को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 19 June 2026, 9:39 AM IST
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Ayodhya: अयोध्या में राम मंदिर की दान राशि में कथित गड़बड़ी का मामला अब कई बड़े सवालों के घेरे में आ गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब चोरी और हेरफेर की आशंका सामने आ चुकी थी, तो अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई। वहीं दूसरा बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने किस अधिकार के तहत पिछले करीब दो सप्ताह से संदिग्ध लोगों को बैठाकर उनसे पूछताछ की और उनकी निशानदेही पर रकम बरामद कराई।

6 जून को सामने आया था मामला

सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर दान राशि में गड़बड़ी का मामला 6 जून को सामने आया था। इसके बाद ट्रस्ट के स्तर पर ही मामले को संभालने की कोशिश की गई। बताया जा रहा है कि गोपनीय तरीके से कुछ संदिग्धों को चिह्नित किया गया और उन्हें पकड़कर पूछताछ शुरू की गई। इसके बाद उनकी निशानदेही पर रकम बरामद होने की बात भी सामने आई। अब सवाल उठ रहा है कि जब मामला इतना गंभीर था तो पुलिस में तत्काल शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई गई। जांच एजेंसियों के सक्रिय होने से पहले यह पूरी प्रक्रिया क्यों चलती रही।

बिना एफआईआर पूछताछ पर उठे सवाल

मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर कानून के जानकार और पूर्व पुलिस अधिकारी भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर चोरी की पुष्टि हो चुकी थी और संदिग्धों से पूछताछ के बाद रकम बरामद हुई थी, तो फिर कानूनी प्रक्रिया के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए था। बिना एफआईआर किसी व्यक्ति को इतने दिनों तक बैठाकर पूछताछ करना भी सवालों के घेरे में है। पकड़े गए संदिग्धों में लवकुश का नाम भी सामने आया है। उसके परिवार वालों का कहना है कि वह कभी-कभी घर आता था, लेकिन मंदिर मामले के बाद से ट्रस्ट के लोग उसे लेकर गए और तब से परिवार का संपर्क नहीं हो पाया।

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सबूत मिटाने की आशंका भी जांच के दायरे में

मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि एसआईटी के गठन से पहले कहीं सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं हुई। क्योंकि पहले ट्रस्ट स्तर पर संदिग्धों की पहचान, पूछताछ और बरामदगी की प्रक्रिया चली, जबकि पुलिस जांच बाद में शुरू हुई। हालांकि सूत्रों के अनुसार एसआईटी को जांच के दौरान कई अहम साक्ष्य मिले हैं और इन्हीं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

चढ़ावे के जेवरातों का हिसाब भी नहीं मिल रहा

दान राशि मामले में अब जांच सिर्फ नकदी तक सीमित नहीं रही है। एसआईटी की नजर मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए सोने, चांदी, हीरे और अन्य कीमती जेवरातों पर भी है। सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारी चढ़ावे में मिले जेवरातों का पूरा हिसाब-किताब जांच टीम को नहीं दे पा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि अगर नकदी में गड़बड़ी हुई है तो संभव है कि कीमती आभूषणों के रिकॉर्ड में भी अनियमितता हुई हो। दान किए गए जेवरातों की रसीद, रिकॉर्ड और उनके रखरखाव से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

ट्रस्ट पदाधिकारियों से घंटों पूछताछ

एसआईटी ने मामले की जांच के चौथे दिन भी कई लोगों से पूछताछ की। ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल मिश्रा से करीब तीन घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। इसके अलावा गोपाल राव और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी जांच टीम ने जानकारी ली। सूत्रों के अनुसार नकदी से जुड़े रिकॉर्ड में कई खामियां मिली हैं। वहीं जेवरातों से जुड़े दस्तावेज भी जांच टीम के सवालों के घेरे में हैं।

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टिन्नू यादव से दोबारा पूछताछ

चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव से एसआईटी ने दोबारा पूछताछ की। जांच टीम यह जानना चाहती है कि दान राशि की गिनती और प्रक्रिया में उसकी क्या भूमिका थी। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब वह ट्रस्ट का पदाधिकारी नहीं था तो मंदिर की व्यवस्थाओं में उसकी इतनी मौजूदगी क्यों रहती थी। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में टिन्नू ने दान राशि की प्रक्रिया से जुड़े कुछ नाम बताए हैं, जिसके बाद जांच टीम कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।

18 लोगों से पूछताछ

एसआईटी अब तक ट्रस्ट के पदाधिकारियों, कर्मचारियों और संदिग्धों समेत करीब 18 लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें टिन्नू यादव का भतीजा मनीष यादव और गोपाल राव का भतीजा सोमेश भी शामिल हैं। हालांकि ये लोग ट्रस्ट के आधिकारिक पदाधिकारी नहीं हैं, लेकिन मंदिर की व्यवस्थाओं में उनकी भूमिका को लेकर जांच की जा रही है।

श्रद्धालु ने उठाया जेवर गायब होने का सवाल

मामले में एक श्रद्धालु का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उसने दावा किया कि उसने मंदिर में कीमती हार दान किया था, लेकिन उसे उसकी रसीद नहीं मिली। श्रद्धालु ने सवाल उठाया कि आखिर उसका दान किया हुआ हार कहां गया। एसआईटी ऐसे सभी मामलों को भी जांच में शामिल कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चढ़ावे में मिले सामान का रिकॉर्ड कितना सही है।

Location :  Ayodhya

Published :  19 June 2026, 9:39 AM IST

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