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एसआईटी रिपोर्ट में अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल (Source: Pinterest )
Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, लेकिन अब तक किसी बड़े जिम्मेदार के खिलाफ कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया है। इस बीच राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे को ही बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक बैंक के साथ हुए एमओयू पर अनिल मिश्रा के हस्ताक्षर थे और चढ़ावा राशि की गणना से जुड़ी प्रक्रिया में भी उनकी प्रमुख भूमिका थी।
एसआईटी ने एमओयू की शर्तों में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए थे। इसी वजह से माना जा रहा था कि पुलिस की विवेचना में उनका नाम आरोपी के तौर पर शामिल किया जा सकता है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
इनमें टिन्नू यादव, सुभाष, अनुकल्प, लवकुश, मनीष, अविनाश, करुणेश और रमाशंकर के नाम शामिल हैं। मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है।
अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब सवाल यह है कि क्या उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होगी या मामला केवल इस्तीफे तक सीमित रहेगा। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि उन्होंने अपनी संलिप्तता से इनकार किया है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में अंतिम स्थिति पुलिस की विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि एसआईटी की रिपोर्ट में उठाए गए सवालों के बावजूद अनिल मिश्रा का नाम एफआईआर में शामिल होगा या नहीं। फिलहाल उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है।
विवेचना पूरी होने तक पुलिस के पास यदि पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो आगे की कार्रवाई संभव है। अब सभी की नजर जांच की अगली रिपोर्ट पर टिकी है कि चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा कहां तक पहुंचता है और किन जिम्मेदारों की भूमिका सामने आती है।
Location : Ayodhya
Published : 8 August 2026, 10:33 AM IST
Topics : ayodhya news ram mandir news UP News