7 साल बाद खुला दहेज हत्या का राज! कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, सास को 10 साल की सजा, बेटे को भी नहीं मिली राहत

गोरखपुर की अदालत ने वर्ष 2018 के दहेज हत्या मामले में मुख्य अभियुक्ता गिरजा देवी को 10 साल और सह अभियुक्त बब्लू को दो साल की सजा सुनाई है। ऑपरेशन कनविक्शन के तहत प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने दोनों को दोषी करार देते हुए जुर्माना भी लगाया।

Gorakhpur: गोरखपुर के बहुचर्चित दहेज हत्या मामले में शुक्रवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य अभियुक्ता गिरजा देवी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं सह अभियुक्त बब्लू को दो वर्ष के सश्रम कारावास और 8 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी-1 (ASJ/FTC-1) गोरखपुर की अदालत ने सुनाया।

2018 में दर्ज हुआ था दहेज हत्या का मामला

यह मामला वर्ष 2018 में थाना राजघाट क्षेत्र में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 197/2018 से जुड़ा है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए, 304बी, 326 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।

सास और बेटे को मिली अलग-अलग सजा

अदालत ने गिरजा देवी, पत्नी दिनेश, निवासी तुर्कमानपुर बिहारी टोला, थाना राजघाट को दहेज हत्या के मामले में दोषी मानते हुए 10 साल के सश्रम कारावास और 13 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं बब्लू, पुत्र दिनेश को धारा 498ए आईपीसी एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल के सश्रम कारावास और 8 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

ऑपरेशन कनविक्शन के तहत मिली सफलता

गोरखपुर पुलिस के अनुसार, यह सफलता उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन कनविक्शन" अभियान के तहत मिली है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में थाना राजघाट की टीम, विवेचक, पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने लगातार प्रभावी पैरवी की। मुकदमे की हर सुनवाई पर साक्ष्यों को मजबूती से अदालत के सामने रखा गया, जिससे अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा।

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सरकारी वकीलों की अहम भूमिका

पुलिस ने बताया कि अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) रमेश चन्द्र पाण्डेय और अतुल कुमार शुक्ला ने अदालत में प्रभावी कानूनी पैरवी की। उनके तर्कों और प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने दोषियों के खिलाफ फैसला सुनाया।

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दहेज अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश

गोरखपुर पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन कनविक्शन का उद्देश्य गंभीर अपराधों में त्वरित और प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाना है। अदालत का यह फैसला दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या जैसे मामलों में कानून की सख्ती को दर्शाता है और समाज में ऐसा अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश भी माना जा रहा है।

Location :  Gorakhpur

Published :  24 July 2026, 6:07 PM IST

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