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नई दिल्ली में शुक्रवार को MCX पर सोना और चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। डॉलर इंडेक्स में गिरावट के चलते निवेशकों ने खरीदारी बढ़ाई, जिससे दामों में उछाल आया। हालांकि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें आगे की दिशा तय करेंगी।
पश्चिम एशिया तनाव के बीच सोना-चांदी के भाव में तेजी (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर जून वायदा सोना करीब 1 प्रतिशत चढ़कर 1,43,829 रुपय प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं मई वायदा चांदी में और अधिक तेजी देखने को मिली, जो लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 2,23,978 रुपय प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करती दिखी।
कीमती धातुओं में इस तेजी के पीछे डॉलर की कमजोरी एक अहम कारण मानी जा रही है। US Dollar Index में करीब 0.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सस्ता हो गया। इसका असर यह हुआ कि निवेशकों ने गिरावट के बाद खरीदारी बढ़ा दी। आमतौर पर डॉलर के कमजोर होने पर सोने की मांग में बढ़ोतरी होती है, क्योंकि अन्य मुद्राओं में निवेश करने वालों के लिए इसकी लागत कम हो जाती है।
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वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते पश्चिम एशिया में अस्थिरता बनी हुई है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है, जहां तेजी देखने को मिल रही है। तेल की बढ़ती कीमतें कई बार डॉलर को मजबूती देती हैं, जो सोने की कीमतों के लिए दबाव का कारण बन सकती हैं।
मार्च महीने के दौरान सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। MCX के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में घरेलू हाजिर सोने की कीमतों में करीब 9 प्रतिशत की गिरावट आई थी। इस गिरावट के बाद अब निवेशकों ने फिर से खरीदारी शुरू की है, जिससे कीमतों में कुछ हद तक सुधार देखने को मिल रहा है।
जानकारों का मानना है कि निकट अवधि में सोने और चांदी की कीमतों में सीमित तेजी बनी रह सकती है। हालांकि हाल के उच्च स्तरों को पार करना फिलहाल चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितता कीमतों को समर्थन दे सकती है, लेकिन मजबूत होता डॉलर तेजी पर अंकुश लगा सकता है।
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और वैश्विक संकेतों पर नजर रखने की जरूरत है। डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा तय करेंगे।