हिंदी
प्रतिकात्मक फोटो (Img Source: Google)
New Delhi: इतिहास गवाह है कि जब भी दुनिया में बड़ा तेल संकट आया है, उसके बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। SBI रिसर्च के अनुसार 1973 से लेकर 2008 तक कई बड़े ऑयल शॉक के बाद अमेरिका में मंदी के हालात बने।
1973-74 के अरब तेल प्रतिबंध के दौरान तेल 3 डॉलर से बढ़कर 12 डॉलर हो गया और सिर्फ एक महीने में अमेरिका मंदी में चला गया। 1979 में ईरान संकट के बाद तेल 14 डॉलर से 35 डॉलर पहुंचा और लगभग 11 महीने बाद मंदी आई। 1990 के खाड़ी युद्ध के दौरान तेल दोगुना हुआ और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर दिखा। 2007-08 के दौरान जब तेल 70 डॉलर से 147 डॉलर तक पहुंच गया, तो कुछ ही महीनों में वैश्विक वित्तीय संकट गहरा गया। हालांकि 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध और 2026 के पश्चिम एशिया संकट में तस्वीर थोड़ी अलग रही, जहां प्रभाव तो दिखा लेकिन वैश्विक मंदी पूरी तरह घोषित नहीं हुई।
SBI रिसर्च का कहना है कि इस बार अमेरिका पहले की तुलना में ज्यादा ऊर्जा आत्मनिर्भर है। यही वजह है कि महंगे तेल का असर पहले जैसा विनाशकारी नहीं दिख सकता। इसके अलावा टैक्स रिफंड और आर्थिक सपोर्ट सिस्टम भी घरेलू खपत को संभाल रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खतरा खत्म हो गया है। रिपोर्ट साफ कहती है कि 2026 में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के करीब पहुंच सकता है, जबकि 2025 में यह 69 डॉलर था। यानी कीमतों में तेज उछाल की संभावना बनी हुई है।
विश्व बैंक के बंगा बोले- मध्य पूर्व एशिया में संघर्ष से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा खतरा
IMF के आंकड़े बताते हैं कि तेल संकट का असर हर देश पर अलग-अलग पड़ता है। विकसित देशों में GDP पर औसतन 0.7% तक असर पड़ता है, जबकि कम आय वाले देशों में यह 1% से ज्यादा हो सकता है। जहां तेल आयात करने वाले देश घाटे में जाते हैं, वहीं तेल निर्यातक देशों की स्थिति मजबूत हो जाती है। इसका मतलब साफ है कि वैश्विक असमानता इस झटके में और बढ़ सकती है।
SBI रिसर्च के मुताबिक भारत इस बार वैश्विक संकट में कमजोर नहीं बल्कि मजबूत स्थिति में है। वित्त वर्ष 2026 में भारत की ग्रोथ 7.6% रही है, जो आर्थिक स्थिरता को दर्शाती है। रूस-यूक्रेन संकट के दौरान भी भारत 9% से ज्यादा की विकास दर के साथ आगे बढ़ रहा था। रिपोर्ट का संकेत है कि भारत अब बाहरी झटकों को पहले की तुलना में बेहतर तरीके से झेल सकता है।
Location : New Delhi
Published : 20 April 2026, 1:25 PM IST