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विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा (Img- Internet)
New Delhi: विश्व स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव अब केवल राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि इनका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और यूक्रेन युद्ध जैसे हालात मिलकर वैश्विक आर्थिक स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
अटलांटिक काउंसिल में दिए गए अपने बयान में अजय बंगा ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष वैश्विक विकास दर को धीमा कर सकते हैं। उन्होंने अनुमान जताया कि पहले जिन अर्थव्यवस्थाओं में 2.8 से 3 प्रतिशत की विकास दर की उम्मीद थी, वह घटकर 1 प्रतिशत से थोड़ा अधिक रह सकती है।
बंगा के अनुसार, संघर्ष बढ़ने की स्थिति में महंगाई दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जो दो प्रतिशत अंक तक बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, उर्वरक और रसायन जैसे क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर एशिया और अफ्रीका की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
विश्व बैंक प्रमुख ने कहा कि उभरते बाजार पहले से ही राजकोषीय और ऋण संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में वैश्विक तनाव इन देशों के लिए स्थिति और कठिन बना सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विकसित अर्थव्यवस्थाएं भी इन प्रभावों से अछूती नहीं रहेंगी।
अजय बंगा ने संकेत दिया कि विश्व बैंक प्रभावित देशों को राहत देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में 20 से 25 अरब डॉलर की तत्काल सहायता दी जा सकती है, जो परिस्थितियों के अनुसार 60 से 70 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। यह सहायता तरलता (liquidity) संकट को कम करने के लिए होगी।
उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान विकसित किए गए आपातकालीन वित्तीय उपकरण अब इस संकट में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। “ये वे सीख हैं जो हमने COVID के दौरान हासिल कीं,” उन्होंने कहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक संस्थाएं अब तेज प्रतिक्रिया देने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
बंगा ने सरकारों को चेतावनी दी कि वे व्यापक सब्सिडी के बजाय लक्षित और अस्थायी राहत उपाय अपनाएं। उनका कहना था कि अनियंत्रित वित्तीय सहायता दीर्घकालिक ऋण बोझ को और बढ़ा सकती है, जिससे आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में चल रहे विभिन्न संघर्ष एक साथ मिलकर अस्थिरता बढ़ा रहे हैं। उन्होंने यूक्रेन, गाजा और मध्य पूर्व के हालात का उल्लेख करते हुए कहा कि यह “संकटों का एक जाल” है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को नए जोखिमों की ओर धकेल रहा है।
अजय बंगा ने यह भी कहा कि देशों को अब अपनी ऊर्जा रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। उन्होंने गैस, परमाणु ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के मिश्रण को आवश्यक बताया ताकि भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर रह सके।
Location : New Delhi
Published : 10 April 2026, 10:30 AM IST