US India Relations: ट्रंप के दूत ने भारत की तारीफ में पढ़े कसीदे: कुछ ऐसा कह दिया कि दुनिया के बाकी देश रह गए हैरान

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत को उभरता हुआ वैश्विक 'पावर सेंटर' बताया है। टैरिफ और कश्मीर जैसे मुद्दों पर उपजे तनाव के बावजूद, ट्रंप प्रशासन सेमीकंडक्टर, AI और जेनेरिक दवाओं जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत कर रहा है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 30 May 2026, 9:32 AM IST
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Washington: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले नए प्रशासन ने भारत के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों को लेकर एक बेहद सकारात्मक और बड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी राजदूत और ट्रंप के प्रमुख सहयोगी सर्जियो गोर ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन, भारत को महज एक सहयोगी नहीं बल्कि एक प्रमुख वैश्विक शक्ति (ग्लोबल पावर) के रूप में देखता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच की साझेदारी को आने वाले समय में और अधिक गहरा और मजबूत किया जाएगा। गोर ने भारत को दुनिया के उन नए 'पावर सेंटर्स' में गिनाया, जिनके साथ अमेरिका भविष्य की वैश्विक व्यवस्था के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहता है।

शक्ति के नए केंद्र के रूप में भारत की पहचान

राजदूत सर्जियो गोर ने अमेरिकी नीति में आ रहे बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान प्रशासन दुनिया भर में शक्ति के नए और उभरते हुए केंद्रों की पहचान कर रहा है। इस कड़ी में भारत सबसे अग्रणी भूमिका में है। उन्होंने कहा, "हम भारत की अपार संभावनाओं और इसकी तीव्र विकास क्षमता को अच्छी तरह समझते हैं। यही कारण है कि हम इस द्विपक्षीय साझेदारी को केवल बनाए रखने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि इसे एक नए स्तर पर ले जाकर और मजबूत करना चाहते हैं।"

गौरतलब है कि इस बयान से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी भारत का दौरा किया था, जिसे पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच उपजे कूटनीतिक तनाव को दूर करने और रिश्तों को पटरी पर लाने की एक गंभीर कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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ट्रंप के फैसलों से पैदा हुई थीं कड़वाहटें

सर्जियो गोर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ हालिया फैसलों ने नई दिल्ली को असमंजस और चिंता में डाल दिया था। ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने के फैसले से व्यापारिक गलियारों में नाराजगी थी। इसके अलावा, 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अमेरिका द्वारा सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान का समर्थन करने, कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर हस्तक्षेप की कोशिश करने और चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध में अचानक अपने रुख को नरम करने जैसे कदमों ने भारत को हैरान किया था। अमेरिका के भीतर भी भारत विरोधी बयानबाजी को बढ़ावा देने को लेकर ट्रंप प्रशासन को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, जिससे दोनों देशों के संबंधों में कुछ समय के लिए ठंडापन आ गया था।

इन रणनीतिक क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे दोनों देश

तमाम कूटनीतिक और व्यापारिक उतार-चढ़ावों के बावजूद, दोनों देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। राजदूत गोर ने उन क्षेत्रों का विशेष रूप से उल्लेख किया जहां भारत और अमेरिका का सहयोग नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने 'क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी' (iCET) पहल के विस्तार की सराहना की, जो मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी भविष्य की तकनीकों पर केंद्रित है।

इसके साथ ही, महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला (Critical Minerals Supply Chain), स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। गोर के मुताबिक, इन क्षेत्रों में किए गए समझौतों के जमीनी परिणाम अब दिखने लगे हैं और दोनों पक्षों की ओर से भारी निवेश किया जा रहा है।

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अरबों डॉलर का निवेश और फार्मा क्षेत्र में बड़ी हिस्सेदारी

आर्थिक मोर्चे पर आंकड़ों को साझा करते हुए अमेरिकी राजदूत ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक विश्वास बेहद मजबूत है। अमेज़न जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियां भारत में लगभग 35 अरब डॉलर के कुल निवेश का हिस्सा बन रही हैं। वहीं, भारतीय कंपनियों ने भी अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए वहां लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश किया है।

गोर ने खुलासा किया कि हर हफ्ते अमेरिकी निवेशक दूतावास आकर भारत में निवेश की सुरक्षा को लेकर सवाल करते हैं, और उन्हें हमेशा सकारात्मक आश्वासन दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, वॉशिंगटन स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में भारत पर अपनी निर्भरता और सहयोग को स्वीकार करता है, क्योंकि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली लगभग 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से ही सप्लाई होती हैं।

Location :  Washington

Published :  30 May 2026, 9:25 AM IST

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