Akbarnagar Story: बाढ़ ने रोकी राह, लेकिन नानी की ममता ने खींच लिया नाती को ननिहाल

अकबरनगर में बाढ़ ने रास्तों पर पानी और कीचड़ बिछा दिया, लेकिन अपनों तक पहुंचने की चाहत को नहीं रोक सकी। रनुचक गांव की बीमार नानी ललिता देवी की तबीयत खराब होने की खबर जब उनके नाती को मिली, तो उसने मुश्किल हालात की परवाह किए बिना ननिहाल की राह पकड़ ली।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 20 September 2026, 3:59 PM IST
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अकबरनगर। बाढ़ ने रास्तों पर पानी और कीचड़ बिछा दिया, लेकिन अपनों तक पहुंचने की चाहत को नहीं रोक सकी। रनुचक गांव की बीमार नानी ललिता देवी की तबीयत खराब होने की खबर जब उनके नाती को मिली, तो उसने मुश्किल हालात की परवाह किए बिना ननिहाल की राह पकड़ ली।

नानी की सेवा के लिए ननिहाल पहुंचा नाती

बिहार में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन अकबरनगर के गांवों में जिंदगी अभी भी मुश्किलों के बीच सांस ले रही है। कहीं घरों के आसपास गंदा पानी जमा है तो कहीं कीचड़ से रास्ते चलने लायक नहीं हैं। रोजगार ठप होने और घर-आंगन में पसरी गंदगी के बीच ग्रामीण सामान्य जिंदगी लौटने का इंतजार कर रहे हैं। इन परेशानियों के बीच रनुचक गांव से सामने आई एक तस्वीर ने बाढ़ के दर्द के बीच रिश्तों की गर्माहट का अहसास कराया।

रनुचक गांव की रहने वाली ललिता देवी की तबीयत खराब थी। उनकी बीमारी की खबर जब नाती तक पहुंची तो बाढ़ और जलजमाव के कारण रास्ते मुश्किल होने के बावजूद वह ननिहाल पहुंच गया। रास्ते में कितनी परेशानी आई, यह उसके लिए मायने नहीं रखता था। उसके सामने सिर्फ एक चिंता थी—बीमार नानी को अकेला नहीं छोड़ना।

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बाढ़ से घिरे गाँव में यह प्रयास पेश कर रहा मिसाल

ननिहाल पहुंचने के बाद नाती ने नानी की देखभाल की जिम्मेदारी संभाल ली। दवा से लेकर भोजन और जरूरत की दूसरी चीजों का इंतजाम करने में जुट गया। कभी नानी की तबीयत पूछता तो कभी उनके लिए पानी और दवा लाता। बाढ़ से घिरे गांव में उसका यह छोटा-सा प्रयास रिश्तों की बड़ी तस्वीर पेश कर रहा था।

अकबरनगर क्षेत्र के कई गांव इस समय बाढ़ के बाद की मुश्किलों से गुजर रहे हैं। अकबरनगर, श्रीरामपुर, भवनाथपुर, किशनपुर, खुटाहा, शाहाबाद, बसंतपुर, मकंदपुर और इंग्लिश चिचरौंन के निचले इलाकों में बाढ़ ने लोगों की दिनचर्या बदल दी। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों का सहारा लेना पड़ा। अब पानी घटने के बाद लोग घर लौट रहे हैं, लेकिन घर लौटना भी किसी राहत से कम चुनौती नहीं है।

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घर लौटे लोग, लेकिन मुश्किलें साथ लौटीं

राहत शिविरों में कई दिन बिताने के बाद ग्रामीण अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। मगर घरों में पहुंचकर उन्हें पता चल रहा है कि बाढ़ का पानी उतरना ही मुश्किलों का अंत नहीं है। सफाई, जलनिकासी और बीमारी का खतरा अब नई चिंता बनकर सामने है। लंबे समय तक जमा पानी और कीचड़ के कारण लोगों को संक्रमण और दूसरी बीमारियों का डर सता रहा है। दूसरी ओर, कई परिवारों की कमाई बाढ़ के दौरान रुक गई। अब उनके सामने घर की सफाई के साथ-साथ रोजी-रोटी फिर से शुरू करने की चुनौती है।

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मुश्किल वक्त में पड़ोसी बने सहारा

बाढ़ ने भले ही लोगों के घरों और रोजगार को प्रभावित किया हो, लेकिन इस संकट में ग्रामीणों के बीच आपसी सहयोग भी दिखाई दिया। किसी ने जरूरतमंद परिवार तक भोजन पहुंचाया तो किसी ने मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराया। कई लोगों ने एक-दूसरे के घरों तक जरूरी सामान पहुंचाने में मदद की। रनुचक में बीमार नानी के पास पहुंचा नाती भी इसी मानवीय भावना की एक तस्वीर है। बाढ़ ने उसके रास्ते में पानी और कीचड़ जरूर खड़ा किया, लेकिन अपने रिश्ते तक पहुंचने की उसकी इच्छा को नहीं रोक सकी।

बाढ़ का पानी उतर जाएगा, कीचड़ भी सूख जाएगा, लेकिन मुश्किल वक्त में अपनों के साथ खड़े रहने की यह तस्वीर लंबे समय तक याद रहेगी।

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Location :  akbarnagar

Published :  20 September 2026, 3:59 PM IST

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