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सोनभद्र खनन हादसे में सात आदिवासी मजदूरों की मौत के बाद सपा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर चेक वितरित किए गए और अवैध खनन, सुरक्षा इंतजामों की कमी व मुआवजे को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया।
Sonbhadra: जिले में 15 नवंबर को हुए दर्दनाक पत्थर खदान हादसे में सात आदिवासी श्रमिकों की मौत के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) का 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सोनभद्र पहुंचा और खदान हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक-एक लाख रुपये का चेक वितरित किया।
सपा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यह हादसा सरकार की लापरवाही और अवैध खनन के बेलगाम होने का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार केवल बड़े लोगों और पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है, जबकि गरीब, आदिवासी और मजदूरों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते सरकार की जिम्मेदारी है कि वह श्रमिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करे, लेकिन सोनभद्र जैसे खनिज संपन्न जिले में यह जिम्मेदारी पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है।
प्रतिनिधिमंडल ने सोनभद्र में पोकलेन मशीनों और ब्लास्टिंग के जरिए हो रहे अवैध खनन पर गहरी चिंता जताई। सपा नेताओं का कहना था कि अवैध खदानों में न तो किसी तरह के सुरक्षा इंतजाम होते हैं और न ही खनन नियमों का पालन किया जाता है। गहरी खुदाई और खदान की दीवारों के ढहने से लगातार हादसे हो रहे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और आदिवासी मजदूरों को उठाना पड़ता है। इसके साथ ही खनन से फैल रहे प्रदूषण का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हवा इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि आम लोगों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया है।