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जल संस्थान का नया फॉर्मूला (Img: Dynamite News)
Nainital: पानी जिंदगी है, लेकिन नैनीताल के ज्योलीकोट में यही पानी अब लोगों के लिए डर और दर्द की वजह बन गया ह जिस पानी से कभी गांव की प्यास बुझती थी, वही दूषित पानी बीमारी का कारण बन गया। क्षेत्र में बीमारी फैलने के बाद अस्पताल मरीजों से भर गए और कई परिवार अपनों के इलाज को लेकर परेशान रहे। दूषित पानी से जुड़ी बीमारी के बीच तीन लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। नलों से दूषित पानी की सप्लाई बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर टैंकर लगाए गए, लेकिन पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों के बीच टैंकर का पानी भी हर घर तक पहुंचाना आसान नहीं है।
ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव के कई परिवारों में लोग बीमार हुए हैं। किसी घर का सदस्य अस्पताल में भर्ती है तो कोई इलाज के लिए अस्पताल के चक्कर काट रहा है। क्षेत्र का एकमात्र अस्पताल भी मरीजों से भरा हुआ है। जगह और संसाधनों पर दबाव के चलते प्राथमिक उपचार के बाद कई मरीजों को दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ रहा है।
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तीन लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्थाओं को लेकर जरूरी निर्देश जारी किए। स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल को 24 घंटे संचालित रखने के निर्देश दिए गए। वहीं दूषित पानी की सप्लाई बंद कर लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए टैंकरों की व्यवस्था की गई।
हालांकि, सड़क तक पहुंच रहा टैंकर हर घर तक पानी पहुंचाने की समस्या का समाधान नहीं कर पा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार कई दूर-दराज के इलाकों में लोगों को कई दिनों से पानी नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों को डेढ़ से दो किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है। ऐसे परिवारों के सामने परेशानी और बढ़ जाती है, जिनके घर में कोई बीमार है। उन्हें एक तरफ मरीज की देखभाल करनी है और दूसरी तरफ पानी की व्यवस्था के लिए घर से दूर जाना पड़ रहा है।
पहाड़ी इलाकों में घरों की दूरी और सड़क से गांवों की स्थिति को देखते हुए केवल टैंकर के भरोसे पानी पहुंचाना आसान नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था के साथ-साथ सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
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इस समस्या को देखते हुए अब जल संस्थान ने वैकल्पिक व्यवस्था पर काम शुरू किया है। अधिकारियों के मुताबिक सड़क पर खड़े टैंकर से पानी भरकर दूर स्थित घरों तक पहुंचाने में लोगों को परेशानी हो रही है। ऐसे गांवों को चिह्नित किया जा रहा है, जो सड़क से दूर हैं। वहां पाइप लाइन को बीच से काटकर टैंकर से जोड़ते हुए पानी को सीधे गांव के नालों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। कुछ गांवों में इसकी शुरुआत भी कर दी गई है। विभाग का प्रयास है कि दूर-दराज के गांवों में पर्याप्त पानी पहुंच सके, ताकि ग्रामीण तीन से चार दिनों तक पानी का भंडारण कर सकें।
इसी बीच ज्योलीकोट स्थित सेंट एंथोनीज कॉन्वेंट स्कूल में भी पेयजल व्यवस्था को लेकर लापरवाही सामने आई है। जल संस्थान की जांच में स्कूल की पानी की टंकियों में अस्वच्छ पानी पाए जाने के बाद उप जिलाधिकारी न्यायालय ने टंकियों के पानी के पेयजल के रूप में इस्तेमाल और वितरण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
जांच के दौरान स्कूल की पानी की टंकियों की सफाई कराई गई तो उनमें गंदा पानी और मिट्टी भी पाई गई। प्रशासन ने टंकियों की समुचित सफाई और विसंक्रमण कराने के साथ पानी के नमूने अधिकृत प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं।
विद्यालय प्रबंधन को विद्यार्थियों और स्कूल में कार्यरट कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और मानकयुक्त वैकल्पिक पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती, तब तक संबंधित जलस्रोत का दोबारा पेयजल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
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निर्देशों के तहत विद्यालय प्रबंधन को 13 सितंबर 2026 तक आवश्यक कार्रवाई पूरी करनी है। इसके बाद 14 सितंबर को अनुपालन आख्या यानी कंप्लायंस रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जानी है।
दरअसल, ज्योलीकोट में बीमारी फैलने के दौरान स्कूल के ज्यादातर बच्चे भी बीमार हो गए थे। इसके बाद शिक्षा विभाग ने अग्रिम आदेश तक स्कूलों को बंद रखने के निर्देश जारी किए थे। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि विद्यालय में पानी की व्यवस्था तो थी, लेकिन जल संस्थान या जल निगम का कनेक्शन नहीं था। स्कूल प्रबंधन ने एक स्रोत से पाइप लाइन के जरिए पानी टैंक तक पहुंचाने की व्यवस्था की थी।
टैंक की स्थिति सामने आने के बाद उसकी सफाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए। जब टैंक की हालत को अधिकारियों ने द खातो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। टैंक की कई सालों से सफाई ही नहीं की गई थी।
Location : Nainital
Published : 13 September 2026, 12:42 PM IST
Topics : Jeolikote Nainital News Uttrakhand water crisis