उत्तराखंड में BJP का बड़ा राजनीतिक दांव: सामान्य सीटों पर भी उतरेंगे दलित चेहरे, क्या इससे बदल जाएगा सियासी समीकरण?

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने नया सियासी दांव चलने की तैयारी की है। 13 आरक्षित सीटों के अलावा अब सामान्य वर्ग की 2 सीटों पर भी अनुसूचित जाति के उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं। जानिए बीजेपी के इस नए मास्टरस्ट्रोक का पूरा गणित।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 14 September 2026, 4:04 PM IST
google-preferred

Dehradun: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने राजनीतिक ताने-बाने को अभी से कसना शुरू कर दिया है। प्रदेश की राजनीति में अनुसूचित जाति (एससी) वोट बैंक को साधने के लिए बीजेपी एक बड़ा और चौंकाने वाला प्रयोग करने की योजना बना रही है।

अंदरखाने चल रही रणनीतिक बैठकों के अनुसार, पार्टी राज्य की 13 आरक्षित (SC) सीटों के अलावा दो सामान्य वर्ग की सीटों पर भी अनुसूचित जाति के प्रत्याशी उतार सकती है। अगर यह रणनीति लागू होती है, तो चुनाव में बीजेपी के कुल 15 उम्मीदवार एससी समुदाय से होंगे।

शुद्धिकरण विवाद और राष्ट्रीय नेतृत्व की गंभीरता

हाल ही में हल्द्वानी में हुए शुद्धिकरण मामले को बीजेपी का केंद्रीय और प्रांतीय संगठन बेहद गंभीरता से ले रहा है। हालिया कोर कमेटी की बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस मुद्दे पर गहन चर्चा की। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस विवाद से पैदा हुए राजनीतिक असर को बेअसर करने के लिए दलित समाज में अपनी पकड़ और मजबूत करना जरूरी है। सामान्य वर्ग की सीटों से दलित प्रत्याशियों को टिकट देकर पार्टी समाज के बीच एक सकारात्मक और समावेशी संदेश देना चाहती है।

UP Election: बीजेपी की चाल से गरमाई यूपी की सियासत, PDA की काट की बनाई खास रणनीति

2022 के नतीजों से सबक और सीटों का नया गणित

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, उत्तराखंड की कुल आबादी में लगभग 18.76 प्रतिशत हिस्सेदारी अनुसूचित जाति वर्ग की है। चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 13 आरक्षित सीटों में से 11 पर परचम लहराया था। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा घटकर 9 पर आ गया।

वर्तमान में पुरोला, थराली, घनसाली, राजपुर रोड, पौड़ी, गंगोलीहाट, बागेश्वर, सोमेश्वर और नैनीताल सीटों पर बीजेपी के विधायक हैं। वहीं बाजपुर, भगवानपुर, झबरेड़ा और ज्वालापुर सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। हरिद्वार जिले की तीनों आरक्षित सीटें कांग्रेस के पास जाने से बीजेपी को बड़ा झटका लगा था।

नगर निगम के घेराव को लेकर भिड़े सपा कार्यकर्ता और बीजेपी समर्थक, आगरा में गरमाई सियासत

दलित वोट बैंक में पैठ मजबूत करने का लक्ष्य

उत्तराखंड में आरक्षित सीटों पर अपनी संख्या बढ़ाने और खोई हुई सीटों को वापस पाने के लिए बीजेपी का यह नया दांव गेमचेंजर साबित हो सकता है। सामान्य सीटों पर अनुसूचित जाति के नेताओं को मौका देने से पार्टी न सिर्फ एससी मतदाताओं का भरोसा दोबारा हासिल करना चाहती है, बल्कि विपक्ष के उस नैरेटिव को भी ध्वस्त करने का इरादा रखती है जो शुद्धिकरण मुद्दे को लेकर बीजेपी पर हमलावर है।

Location :  Dehradun

Published :  14 September 2026, 4:04 PM IST

Related News

Advertisement