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हरिद्वार जिले के कलियर क्षेत्र में एक होटल से जनसेवा केंद्र के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने का धंधा चल रहा था। धंधेबाज अब तक एक हजार लोगों को फर्जी प्रमाण पत्र बेच चुका है। पकड़े जाने पर उसने पुलिस पर रौब झाड़ा कि वह मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष है।
प्रमाण पत्र रैकेट का भंडाफोड़ (Img- Internet)
Haridwar: राज्य में फर्जी प्रमाणपत्रों के बूते नौकरियां हासिल करने की खबरें अक्सर आती रही हैं, लेकिन अब यहां फर्जी प्रमाण पत्रों का गोरखधंधा चलने की भी खबरें आ रही हैं। इस बीच तीर्थ नगरी हरिद्वार के अंतर्गत कलियर थाना पुलिस ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाये जाने के धंधे का पर्दाफाश किया है। यह काला धंधा एक होटल से चल रहा था। पुलिस ने सत्यापन के दौरान होटल में चलाये जा रहे जनसेवा केंद्र पर छापा मारकर फर्जी प्रमाण पत्र बरामद किए हैं।
खास बात यह है कि इस धंधे के मुख्य आरोपी के पास से मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष का फर्जी पहचान पत्र भी बरामद हुआ है। अधिकतर प्रमाण पत्र नगर निगम रुद्रपुर के लेटर पैड पर जारी दिखाए गए हैं। बताया जाता है कि धंधेबाज अब तक वह एक हजार से अधिक फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर लोगों को बेच चुका है। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक धंधेबाज मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और लंबे समय से यहां फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का गोरखधंधा कर रहा था। कलियर थाना पुलिस ने स्थानीय अभिसूचना इकाई की टीम के साथ सत्यापन के दौरान एक होटल के कमरे में छापा मारा। होटल के कमरे में शाहिदा मानवाधिकार जनसेवा केंद्र का बोर्ड लगाकर जनसेवा केंद्र संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने जब संचालक से पूछताछ की, तो उसने अपना नाम शहनवाज निवासी साहिबगंज, मुजफ्फरपुर बिहार बताया।
धंधेबाज ने खुद को मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष बताते हुए पुलिस पर रौब डालने का भी प्रयास किया। पुलिस को उसने अपना पहचान पत्र भी दिखाया। पुलिस ने जांच की तो पहचान पत्र फर्जी मिला। इसके बाद टीम ने इस जनसेवा केंद्र का कोना-कोना खंगाला। वहां पर स्थानीय व बाहरी राज्यों के लोगों के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड व पैन कार्ड बनाने का मामला सामने आया। इन सभी जन्म प्रमाण पत्रों पर सीरियल नंबर एक ही अंकित था और उन पर उत्तराखंड शासन का 'लोगो' लगा हुआ था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने नगर पंचायत पिरान कलियर के ईओ से संपर्क कर दस्तावेजों का मिलान किया गया, जिसमें सभी प्रमाण पत्र फर्जी होने की पुष्टि हुई। प्रमाण पत्रों पर किए गए हस्ताक्षर व मोहरें पूरी तरह जाली हैं। कड़ी पूछताछ में आरोपी शहनवाज ने बताया कि वह गूगल से आनलाइन फार्मेट निकालकर साफ्टवेयर की मदद से ऐडिटिंग करता था। वह अब तक एक हजार से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेज लोगों को बेच चुका है।
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पुलिस ने मौके से 45 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, सात अलग-अलग विभागों की मोहरें, एक लैपटॉप, चार्जर, माउस, छह मोबाइल, छह आधार कार्ड व मानवाधिकार आयोग का फर्जी आईडी कार्ड बरामद किया है। कलियर थाना प्रभारी रविंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।