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देश के पहले अर्बन रोपवे में सफर करना हुआ आसान (सोर्स-एक्स)
Varanasi: देश के पहले शहरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे के रूप में काशी में गंडोले का सफर दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। इसका 96 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और वर्तमान में इसका नियमित ट्रायल चल रहा है। इस अनोखी परिवहन सेवा के जरिए न केवल जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि पर्यटक आसमान से बाबा विश्वनाथ की नगरी का भव्य और अद्भुत नजारा भी देख सकेंगे। हालांकि, प्रशासन ने साफ कर दिया है कि काशी की सांस्कृतिक स्वच्छता बनाए रखने के लिए यात्रियों को कुछ सख्त नियमों का पालन करना होगा।
बनारसियों के लोकप्रिय खानपान और संस्कृति को ध्यान रखते हुए रोपवे प्रशासन ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यदि कोई यात्री पान या गुटखा खाकर स्टेशन के अंदर प्रवेश करने की कोशिश करेगा, तो उसे एंट्री नहीं मिलेगी। इसके अलावा, गंडोला के अंदर से पीक थूकने या किसी भी तरह की गंदगी फैलाने पर भारी जुर्माना वसूला जाएगा। यात्रियों के लिए यह सख्त हिदायत है कि वे अपने साथ पान-गुटखा लेकर भी सफर में न जाएं। इस व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए स्टेशनों के बाहर विशेष तौर पर पीकदान लगाए जाएंगे।
कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक का यह सफर बेहद रोमांचक और सुगम होगा। यात्री मात्र 15 से 16 मिनट में अपनी मंजिल तक पहुंच जाएंगे। इस पूरी यात्रा का न्यूनतम किराया 10 रुपये से शुरू होकर अधिकतम 50 रुपये तक तय किया गया है। नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) का उपयोग करने वाले यात्रियों को किराए में 20 प्रतिशत की विशेष छूट मिलेगी।
यात्री अपने साथ अधिकतम सात किलोग्राम वजन का सामान ले जा सकेंगे। इससे अधिक सामान होने पर अतिरिक्त टिकट खरीदना होगा। वहीं, कैंट स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक लॉकर रूम भी बनाए गए हैं, जहां वे अपना सामान सुरक्षित रख सकते हैं।
काशी का बहुप्रतीक्षित रोपवे दिसंबर से शुरू (सोर्स-Pinterest)
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। कंट्रोल रूम से हर एक पोल और हर एक गंडोला की पल-पल निगरानी की जाएगी। यदि बिजली चली जाती है या कोई तकनीकी खराबी आती है, तो जनरेटर बैकअप के जरिए गंडोला को सबसे नजदीकी स्टेशन तक सुरक्षित पहुंचा दिया जाएगा, जहां से यात्रियों को आसानी से उतारा जा सके।
तेज हवाओं को लेकर भी मानक तय किए गए हैं। हवा की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक होने पर गंडोला स्वतः सुरक्षित रूप से नजदीकी स्टेशन पर रुक जाएंगे। गंडोला के दरवाजे अंदर से नहीं खोले जा सकेंगे, केवल आपात स्थिति में ऑपरेटर टीम ही बाहर से इन्हें खोल सकेगी। इसके अलावा, सावन और देव दीपावली जैसे मेलों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुल 148 गंडोले संचालित होंगे, जिनकी क्षमता 3,000 यात्री प्रति घंटे होगी।
कैंट रेलवे स्टेशन के वेटिंग हॉल से सीधे रोपवे स्टेशन तक एक विशेष ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है, जिससे ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को सड़क के जाम से नहीं जूझना पड़ेगा। स्टेशनों पर लिफ्ट, सीढ़ी और एस्केलेटर की पूरी व्यवस्था है। दिव्यांग जन अपनी व्हीलचेयर के साथ सीधे गंडोला के अंदर तक प्रवेश कर सकेंगे, जहां फोल्डेबल कुर्सियों को मोड़कर व्हीलचेयर के लिए उचित जगह बनाई जा सकती है।
गिरिजाघर स्टेशन के आसपास से ऐतिहासिक गलियों और मंदिरों के शिखर का भव्य दृश्य दिखाई देगा, जबकि पूरे कॉरिडोर के रास्ते में छतों पर सुंदर पेंटिंग उकेरी गई हैं। इस पूरे रूट पर ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो।
Location : Varanasi
Published : 31 October 2026, 9:53 AM IST
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