यूपी में वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग सख्त, डीएम को रोजाना करनी होगी समीक्षा

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों यानी डीएम को सख्त चेतावनी दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने निर्देश दिया है कि वोटर लिस्ट से जुड़ी गड़बड़ियों और लंबित आवेदनों पर समय से कार्रवाई की जाए। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 31 October 2026, 4:34 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीएम) को चेतावनी दी है कि वोटर लिस्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।

साथ ही चुनाव कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने को कहा गया है। ऐसा करने की शिकायत मिलने पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वोटर लिस्ट के काम की जिम्मेदारी डीएम की

शुक्रवार को जारी निर्देशों के मुताबिक, डीएम को प्रतिदिन ईसीआई नेट एप पर लॉगिन करके मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की समीक्षा करनी होगी। मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6, 6ए, 7 और 8 से संबंधित लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों की नियमित समीक्षा कर उनका गुणवत्तापूर्ण समाधान कराना होगा।

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निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि 'बुक ए कॉल विद बीएलओ' के तहत आने वाली कोई भी कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक समय तक लंबित नहीं रहनी चाहिए। डीएम को अपने जिले में मतदाता सूची से जुड़े सभी कार्यों के समन्वय, निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी निभानी होगी।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-13क, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत यह जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी की है। यह जिम्मेदारी केवल निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों या अधीनस्थ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। इसकी अंतिम प्रशासनिक और पर्यवेक्षणीय जवाबदेही डीएम की होगी।

अधिकारियों की प्रोफाइल और लॉगिन की भी होगी जांच

सीईओ ने निर्देश दिया है कि उप जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, बीएलओ सुपरवाइजर और बूथ लेवल अधिकारियों की प्रोफाइल की जांच की जाए। इसमें नाम, मोबाइल नंबर, पदनाम और फोटो की उपलब्धता के साथ उनकी शुद्धता भी सत्यापित करनी होगी।

इसके अलावा इन सभी अधिकारियों के अंतिम लॉगिन की रोजाना समीक्षा की जाएगी। यदि किसी स्तर पर मतदाता का आवेदन लंबित मिलता है, निस्तारण में असामान्य देरी होती है या किसी अधिकारी का लॉगिन निष्क्रिय पाया जाता है, तो तत्काल कारण पता कर जरूरी कार्रवाई करनी होगी।

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शिकायतों का रोजाना करना होगा निस्तारण

राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल (एनजीएसपी) और अन्य माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों की भी प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध, तथ्यपरक और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।

डीएम को स्वयं या अपने द्वारा नामित किसी वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से शिकायतों के जवाबों का नियमित सैंपल परीक्षण भी कराना होगा। निर्देशों में लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही गई है। आयोग के इन निर्देशों का उद्देश्य मतदाता सूची से जुड़े कामकाज की निगरानी और शिकायतों के निस्तारण को जवाबदेह बनाना है।

Location :  Lucknow

Published :  31 October 2026, 4:34 AM IST

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