हिंदी
G-20 में जयशंकर की दो टूक (सोर्स- एक्स)
New Delhi: अमेरिका के अटलांटा शहर में आयोजित G-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है। भारतीय विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि आज की वैश्विक चुनौतियों का हल किसी भी सैन्य समाधान से संभव नहीं है। उन्होंने दुनिया भर के नेताओं से अपील की कि संकटों से निपटने के लिए कूटनीति (डिप्लोमेसी) को पूरी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की, जिन्होंने मौजूदा भू-राजनीतिक और आर्थिक संकटों को पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के लिए एक बड़ा और निर्णायक मोड़ करार दिया।
बैठक के पहले प्लेनरी सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. जयशंकर ने वैश्विक समुद्री मार्गों पर मंडराते खतरों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने सिविलियन जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों पर गंभीर चिंता जताई और इन्हें तत्काल रोकने की मांग की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि ग्लोबल साउथ (विकासशील देश) इस तरह के हमलों के सबसे बुरे परिणाम भुगत रहा है। इन हमलों के कारण ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की आपूर्ति बाधित होने के साथ-साथ उनकी कीमतें भी गंभीर खतरे में पड़ गई हैं।
India-China Relations: एस जयशंकर से बैठक में वांग यी का अमेरिका को जवाब, ट्रंप के रवैये पर उठाए सवाल
भारतीय विदेश मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि समुद्र में नेविगेशन (नौवहन) की पूरी आजादी बरकरार रखी जानी चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के समुद्र कानून संबंधी कन्वेंशन (UNCLOS) समेत अंतरराष्ट्रीय कानूनों का कड़ाई से पालन करने की वकालत की ताकि नागरिक जहाजों पर हो रहे हमलों पर तुरंत रोक लग सके। इस दिशा में एक ठोस कदम उठाते हुए उन्होंने जानकारी दी कि भारत और लाइबेरिया ने मिलकर नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक साझा पहल की शुरुआत की है।
डॉ जयशंकर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे अनुचित तौर-तरीकों की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बाजारों में उत्पादों की बाढ़ लाकर, सप्लाई चेन को हथियार बनाकर, बाजार तक पहुंच सीमित कर और बाजार में जानबूझकर गड़बड़ियां पैदा करके औद्योगिक विकास को रोकने के प्रयासों को अब हर हाल में रोकना होगा। उन्होंने वैश्विक जोखिमों को कम करने, कार्यप्रणाली में विविधता लाने और मजबूत व वैकल्पिक कनेक्टिविटी के निर्माण को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आठ देशों के विदेश मंत्रियों के साथ इन अहम मुद्दों पर की चर्चा
अपने संबोधन के अंत में, भारतीय विदेश मंत्री ने आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधने या इसे नजरअंदाज करने के प्रति दुनिया को आगाह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को नजरअंदाज करना एक बेहद खतरनाक यानी हाई-रिस्क गतिविधि है, जो अंततः इसे बढ़ावा देने वालों और नजरअंदाज करने वालों के लिए भी नुकसानदेह साबित होती है।
Location : New Delhi
Published : 31 October 2026, 9:32 AM IST
Topics : Atlanta G 20 G 20 Foreign Ministers Meeting Military Solutions S Jaishankar Terrorism Warning