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वर्ष 2018 में दर्ज बहुचर्चित हत्या कांड में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आखिरकार न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। थाना सिकरीगंज में पंजीकृत हत्या के मुकदमे में दोष सिद्ध होने पर अदालत ने दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पढ़ें पूरी खबर
दोषियों को उम्रकैद
गोरखपुर: जनपद में वर्ष 2018 में दर्ज बहुचर्चित हत्या कांड में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आखिरकार न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। थाना सिकरीगंज में पंजीकृत हत्या के मुकदमे में दोष सिद्ध होने पर अदालत ने दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 35-35 हजार रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया गया है। फैसले के बाद पुलिस विभाग में इसे “ऑपरेशन कनविक्शन अभियान की महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
दोनों आरोपियों को दोषी करार
पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस के पुलिस महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत पुराने मामलों में प्रभावी पैरवी कर अपराधियों को सजा दिलाने की मुहिम चलाई जा रही है। इसी क्रम में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में थाना सिकरीगंज की टीम, पैरोकार व मॉनिटरिंग सेल ने न्यायालय में मजबूत साक्ष्य और प्रभावी पैरवी प्रस्तुत की, जिसके चलते अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
आजीवन कारावास की सजा
न्यायालय ASJ/PC-2, गोरखपुर द्वारा मु0अ0सं0 145/2018 के तहत धारा 302, 364, 34 व 201 भादवि के मामले में अभियुक्त गौतम पाण्डेय एवं मुकेश पाण्डेय को हत्या के अपराध में दोषी पाया गया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर अपराध सिद्ध होता है, जिसके चलते दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
कई स्तर पर लगातार निगरानी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में विवेचना से लेकर न्यायालय में सुनवाई तक कई स्तर पर लगातार निगरानी की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से ADGC नितिन मिश्रा ने प्रभावी पैरवी करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके चलते अदालत से दोष सिद्धि संभव हो सकी।
अपराधियों को सख्त सजा दिलाने का अभियान
गौरतलब है कि “ऑपरेशन कनविक्शन” के तहत ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनमें लंबे समय से सुनवाई लंबित थी। गोरखपुर पुलिस का कहना है कि भविष्य में भी गंभीर अपराधों में त्वरित कार्रवाई और मजबूत पैरवी सुनिश्चित कर अपराधियों को सख्त सजा दिलाने का अभियान जारी रहेगा।
इस फैसले को कानून व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है, बल्कि समाज में यह संदेश भी गया है कि गंभीर अपराध करने वालों को कानून के शिकंजे से बचना आसान नहीं