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गोरखपुर के गोला तहसील मुख्यालय का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) इन दिनों गंभीर अव्यवस्था और स्टाफ संकट से जूझ रहा है। 30 शैय्या वाले इस अस्पताल में सामान्य तौर पर तीन फार्मासिस्ट तैनात होने चाहिए, लेकिन फिलहाल केवल एक ही चीफ फार्मासिस्ट जे.के. सिंह पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
मरीजों को करना पड़ रहा है घंटों इंतजार
Gorakhpur: गोरखपुर के गोला तहसील मुख्यालय का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) इन दिनों गंभीर अव्यवस्था और स्टाफ संकट से जूझ रहा है। 30 शैय्या वाले इस अस्पताल में सामान्य तौर पर तीन फार्मासिस्ट तैनात होने चाहिए, लेकिन फिलहाल केवल एक ही चीफ फार्मासिस्ट जे.के. सिंह पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, तीन में से एक फार्मासिस्ट का स्थानांतरण सरदारनगर हो चुका है, जबकि दूसरे फार्मासिस्ट अनिल कुमार श्रीवास्तव सेवा निवृत्त हो गए। ऐसे में सभी जिम्मेदारियाँ—दवा लाने से लेकर स्टोर मेंटेनेंस, रिकॉर्ड अपडेट और मरीजों को दवा वितरण एक ही व्यक्ति पर आ गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस वजह से दवा वितरण में देरी हो रही है, स्टॉक सही तरीके से नहीं रखा जा पा रहा और मरीजों की कतारें लगातार बढ़ रही हैं। इससे स्वास्थ्य केंद्र में नाराजगी और असंतोष का माहौल बना हुआ है।
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सीएचसी गोला के अधीक्षक डॉ. अमरेंद्र नाथ ठाकुर ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा, “अस्पताल फिलहाल एक ही फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। हमने इस संबंध में जिले को लिखित सूचना भेज दी है।”
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश झा ने भी स्वीकार किया कि फार्मासिस्टों की कमी समस्या का बड़ा कारण है। उन्होंने कहा, “मामला मेरे संज्ञान में है। जल्द ही आवश्यक व्यवस्था कर फार्मासिस्टों की कमी दूर की जाएगी।”
फार्मासिस्टों की कमी ने मरीजों की सेवा प्रभावित की है। दवा वितरण में देरी, स्टोर प्रबंधन की गड़बड़ी और लंबी कतारों ने स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर समस्या खड़ी कर दी है। स्थानीय लोग स्वास्थ्य विभाग से तत्काल कदम उठाने और अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की मांग कर रहे हैं। उनका सवाल है कि 30 शैय्या वाले महत्वपूर्ण अस्पताल की पूरी व्यवस्था कब तक सिर्फ एक फार्मासिस्ट के भरोसे चलेगी।
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स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ संकट से यह स्पष्ट होता है कि छोटी तहसील स्तर की स्वास्थ्य संस्थाओं में कर्मचारियों की कमी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभाव सीधे मरीजों पर पड़ता है। स्थानीय जनता और प्रशासन दोनों की निगरानी आवश्यक है, ताकि फार्मासिस्टों की कमी जल्द पूरी की जा सके और मरीजों को सुगम, समय पर स्वास्थ्य सेवा मिल सके।