गोरखपुर: “दूध लेने निकले, मौत से हुआ सामना”, ऐसे हुई सड़क हादसे में दर्दनाक मौत

बांसगांव कस्बा बुधवार की सुबह उस वक्त दहल उठा, जब क्षेत्र के सम्मानित और लोकप्रिय व्यक्तित्व अशोक त्रिपाठी (60) की सड़क दुर्घटना में मौत की खबर फैल गई। प्रतिदिन की तरह वह सुबह लगभग 7 बजे बांसगांव–मालहनपार मार्ग पर पैदल दूध लेने जा रहे थे।

Gorakhpur: गोरखपुर के बांसगांव कस्बा बुधवार की सुबह उस वक्त दहल उठा, जब क्षेत्र के सम्मानित और लोकप्रिय व्यक्तित्व अशोक त्रिपाठी (60) की सड़क दुर्घटना में मौत की खबर फैल गई। प्रतिदिन की तरह वह सुबह लगभग 7 बजे बांसगांव–मालहनपार मार्ग पर पैदल दूध लेने जा रहे थे, तभी तेज रफ्तार से आ रहे एक अनियंत्रित वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि श्री त्रिपाठी सड़क पर गिरकर बुरी तरह घायल हो गए। स्थानीय लोग दौड़कर पहुंचे और तत्काल उनके परिजनों को सूचना दी।

परिजन फौरन उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल गोरखपुर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जीवन बचाने का हर प्रयास किया, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि कुछ ही क्षण बाद अशोक त्रिपाठी ने अंतिम सांस ले ली। अचानक हुए इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। घर में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो–रोकर बुरा हाल है।

अशोक त्रिपाठी बांसगांव कस्बे के एक सम्मानित और धार्मिक विचारों वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। लोग उन्हें ‘धर्मगुरु’ के नाम से सम्मान देते थे। समाज में सक्रियता, सरल स्वभाव और सभी की सहायता करने की प्रवृत्ति के कारण वे हर वर्ग में लोकप्रिय थे। इसके साथ ही वे भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में एजेंट के रूप में भी वर्षों से सेवाएं दे रहे थे, जिससे क्षेत्र के कई परिवारों से उनका आत्मीय संबंध था।

उनके निधन से पूरा कस्बा शोक में डूब गया है। पड़ोसी, परिचित, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय दुकानदार उनके घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। हर कोई इस बात से व्यथित है कि एक शांत, मिलनसार और सज्जन व्यक्ति ने यूं सड़क पर अपनी जान गंवा दी।

स्थानीय लोगों ने दुर्घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि बांसगांव–मालहनपार मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों का आतंक बढ़ गया है। आए दिन होने वाले हादसों के बावजूद न तो स्पीड ब्रेकर बने हैं और न ही पर्याप्त पुलिस निगरानी है। लोगों ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने, गति नियंत्रण व्यवस्था लागू करने और दुर्घटनास्थल पर चेतावनी संकेत लगाने की मांग की है, ताकि आगे ऐसे हादसों को रोका जा सके।

अशोक त्रिपाठी अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और तीन पुत्रियों सहित परिवार छोड़ गए हैं। उनके जाने से न केवल परिवार, बल्कि पूरा बांसगांव सदमे में है। उनकी सरलता, धार्मिकता और समाज सेवा की छाप हमेशा जीवित रहेगी।

Location : 
  • Gorakhpur

Published : 
  • 20 November 2025, 4:42 AM IST

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