मेरा बाप मरा नहीं, जिंदा है! सुल्तानपुर में तालाब बचाने की मिली ऐसी सजा, अफसरों ने जिंदा बाप को कर दिया मृत घोषित

सुल्तानपुर में कागजों में एक ऐसा बदलाव हुआ, जिसने पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला दिया। जिस व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत बताया गया, वह हकीकत में जिंदा है। मामला सामने आने के बाद अब तीन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 19 September 2026, 12:17 PM IST
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Sultanpur: उत्तर प्रदेश के जनपद सुल्तानपुर के जयसिंहपुर कोतवाली क्षेत्र में जीवित व्यक्ति को राजस्व अभिलेखों में मृत दर्शाने के आरोप में तत्कालीन तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर हुई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

रामनाथपुर निवासी नरेंद्र उपाध्याय ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना है कि वह गांव की सरकारी जमीन और तालाब को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

मुकदमा वापस लेने का दबाव

नरेंद्र के मुताबिक, इसी मामले की जांच के लिए 9 सितंबर 2023 को तत्कालीन तहसीलदार हृदयराम तिवारी मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि जांच के दौरान तहसीलदार ने नरेंद्र पर हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमे को वापस लेने और शपथपत्र देने का दबाव बनाया।

नरेंद्र का आरोप है कि जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया तो उनके साथ गाली-गलौज की गई। साथ ही जेल भेजने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया। इसके अगले दिन यानी 10 सितंबर 2023 को नरेंद्र के खिलाफ धारा 353 और 506 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था।

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एफआईआर में पिता के नाम के आगे लिख दिया ‘स्वर्गीय’

मामले में सबसे गंभीर आरोप एफआईआर से जुड़ा है। नरेंद्र का कहना है कि एफआईआर में उनके पिता त्रिभुवन उपाध्याय के नाम के आगे ‘स्वर्गीय’ लिख दिया गया, जबकि उनके पिता उस समय जीवित थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से सरकारी अभिलेखों में उनके पिता को जानबूझकर मृत दर्शाया गया। उन्होंने इसे अभिलेखों में फर्जीवाड़ा बताया और मामले में कार्रवाई की मांग की।

पुलिस से शिकायत के बाद कोर्ट पहुंचे नरेंद्र

नरेंद्र ने 7 अक्टूबर 2024 को रजिस्ट्री के माध्यम से पुलिस अधीक्षक को शिकायत भेजी थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया। अधिवक्ता प्रकाश चन्द्र उपाध्याय ने साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में नरेंद्र का पक्ष रखा। न्यायालय के निर्देश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।

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तीन लोग बनाए गए आरोपी

इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार हृदयराम तिवारी, राजस्व निरीक्षक उग्रसेन सिंह और खपड़ाडीह गांव के लेखपाल शिव बहादुर सिंह को आरोपी बनाया गया है। 17 सितंबर को जयसिंहपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया। कोतवाल विवेक राय ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।

Location :  Sultanpur

Published :  19 September 2026, 12:15 PM IST

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