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सिसवा को तहसील बनाए जाने की मांग को लेकर व्यापारियों ने जोरदार नगर बंद किया। “तहसील नहीं तो वोट नहीं” के नारों के साथ बाजार पूरी तरह बंद रहे। व्यापारियों का कहना है कि तहसील न होने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बाजार में दुकानें बंद
Maharajganj: महराजगंज के सिसवा नगरपालिका को तहसील का दर्जा दिलाने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर पूरे जोर-शोर से सामने आ गई है। सोमवार को अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के आह्वान पर सिसवा के व्यापारियों ने अभूतपूर्व एकजुटता दिखाते हुए पूर्ण नगर बंद का आयोजन किया।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, इस बंदी का असर पूरे नगर में साफ दिखाई दिया। सुबह से ही बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और अधिकांश दुकानों पर ताले लटके रहे। महाराजगंज जनपद के गठन के समय से ही सिसवा को तहसील बनाने की मांग की जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि शासन की अनदेखी अब बर्दाश्त से बाहर है।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल, सिसवा स्वर्णकार संघ सहित कई स्थानीय संगठनों के समर्थन से यह बंद पूरी तरह सफल रहा। व्यापारियों ने नगर भ्रमण कर जुलूस निकाला और “तहसील नहीं तो वोट नहीं” जैसे नारों से शासन-प्रशासन को चेतावनी दी।
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नगर भ्रमण के बाद सभी व्यापारी फलमंडी परिसर में एकत्र हुए, जहां धरना देकर सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि महाराजगंज जनपद के गठन के समय से ही सिसवा को तहसील बनाए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार इसे नजरअंदाज किया गया। व्यापारियों ने शासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि अब चुप बैठना संभव नहीं है।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि सिसवा क्षेत्र की आबादी और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए तहसील का दर्जा बेहद जरूरी है। तहसील न होने के कारण लोगों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, भूमि विवाद, रजिस्ट्री और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर-दराज की तहसीलों का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की हानि होती है और क्षेत्र के विकास की गति भी धीमी पड़ जाती है।
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इस आंदोलन में प्रमोद जायसवाल, शिबू खान, अश्वनी रौनियार, हरिराम भालोटिया, जयप्रकाश भालोटिया, दिनेश सोनी, वैष्णो सोनी, रजाउल अंसारी, शिव सोनी, संदीप मल्ल सहित सैकड़ों व्यापारी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। संघर्ष समिति और व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि अगर शासन ने जल्द ही सिसवा को तहसील घोषित करने का निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।