Tejas Fighter Jet Crash: तेजस विमान कैसे हुआ हादसे का शिकार, ऐसे बचायी पायलट ने जान

भारतीय वायुसेना का स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एक बार फिर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। ये तेजस फाइटर जेट की तीसरी बड़ी दुर्घटना मानी जा रही है। गनीमत ये रही कि पायलट की जान बच गई। हादसे के तकनीकी खराबी की जांच शुरू हो गयी है।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 23 February 2026, 3:12 AM IST
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New Delhi: भारतीय वायुसेना का तेजस लड़ाकू विमान ट्रेनिंग उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। गनीमत ये रही कि पायलट की जान बच गई। हादसे के बाद पूरी तेजस फ्लीट की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। यह हादसा एक महत्वपूर्ण ऑपरेशनल एयर बेस पर हुआ। दुर्घटना में विमान के ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है और इसे सर्विस से बाहर किया जा सकता है।

लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा

हादसा उस समय हुआ जब विमान एक रूटीन ट्रेनिंग उड़ान के बाद लैंडिंग की तैयारी कर रहा था। लैंडिंग के दौरान विमान को गंभीर नुकसान पहुंचा। इंपैक्ट इतना तेज था कि विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यह घटना इसी साल 7 फरवरी की है। पाकिस्तान बॉर्डर पर एक फॉरवर्ड एयरबेस पर यह हादसा हुआ।

शुरुआती जानकारी के मुकाबिक, विमान में किसी तकनीकी खराबी की आशंका है। जिसकी वजह से पायलट को आपात स्थिति में इजेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ा। माना जा रहा है कि ऑनबोर्ड सिस्टम में गड़बड़ी इसकी वजह हो सकती है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और तकनीकी टीम सभी पहलुओं की जांच कर रही है। राहत की बात ये रही कि पायलट पूरी तरह सुरक्षित है और उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई है।

तेजस के इतिहास का यह तीसरा क्रैश

ये तीसरी बार है जब तेजस विमान दुर्घटना का शिकार हुआ है। सबसे पहला प्लेन क्रैश मार्च 2024 में जैसलमेर के पास फायरपावर डेमो से लौटते समय हुआ था, जिसमें पायलट की जान बच गई। दूसरी घटना नवंबर 2025 में दुबई एयरशो के दौरान हुई थी, जिसमें पायलट की मौत हो गई थी और उसकी जांच अभी जारी है।

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एचएएल ने किया है तैयार

आपको बता दें कि तेजस भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने डिजाइन और विकसित किया है। ये विमान भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए पुराने लड़ाकू विमानों की जगह शामिल किया जा रहा है। तेजस कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत की मिसाल है, जो विदेशी निर्भरता कम करने और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद करता है।

पिछले कुछ सालों में तेजस से जुड़ी कुछ दुर्घटनाओं और डिलीवरी में देरी की वजह से इस परियोजना पर सवाल भी उठे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नए लड़ाकू विमानों के साथ शुरुआती चरणों में तकनीकी चुनौतियां आना असामान्य नहीं है, लेकिन पायलट की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। फिलहाल, वायुसेना जांच पूरी होने तक सतर्कता बरत रही है।

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IAF और HAL इस घटना से सबक लेकर सुरक्षा प्रोटोकॉल मजबूत कर रहे हैं। पायलट प्रशिक्षण, रखरखाव और तकनीकी जांच पर फोकस बढ़ेगा। तेजस बेड़े की तत्परता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि यह भविष्य की हवाई शक्ति का आधार स्तंभ है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 23 February 2026, 3:12 AM IST

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