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राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन पीड़ित दलित परिवार से मिलने के लिए आगरा से मेरठ के कपसाड़ गांव जा रहे थे लेकिन मेरठ पुलिस ने उन्हें परतापुर टोल पर ही रोक लिया। सांसद रामजीलाल सुमन ने कहा कि यह केवल एक अपराध नहीं। दलित समाज के खिलाफ सुनियोजित अत्याचार है।
धरने पर बैठे (Img: Google)
Meerut: सरधना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की निर्मम हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण की घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। एक ओर जहां बेटी की सलामती को लेकर पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं दूसरी ओर इस घटना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
मेरठ
➡️ कपसाड़ गांव जाने के दौरान सांसद रामजीलाल सुमन को टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोका
➡️ सुरक्षा कारणों से पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी
➡️ संभावित तनाव को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
➡️ कपसाड़ गांव प्रकरण को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज
➡️ सांसद रामजीलाल सुमन… pic.twitter.com/akdBP35iVr— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) January 10, 2026
शनिवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन पीड़ित दलित परिवार से मिलने मेरठ के कपसाड़ गांव जा रहे थे। उनके साथ सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान भी मौजूद थे। लेकिन मेरठ पुलिस ने दोनों नेताओं को परतापुर टोल प्लाजा पर ही रोक लिया। पुलिस ने आगे जाने से रोके जाने पर सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक हो गई। जिसके बाद धक्का-मुक्की तक पहुंच गई।
जब पुलिस ने सपा नेताओं को गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं दी तो रामजीलाल सुमन और अतुल प्रधान अपने समर्थकों के साथ वहीं धरने पर बैठ गए। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर पीड़ित परिवार को राजनीतिक प्रतिनिधियों से मिलने से रोक रहा है ताकि सरकार की विफलता उजागर न हो सके। विधायक अतुल प्रधान ने सवाल उठाया कि घटना के दो दिन बीत जाने के बावजूद न तो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और न ही अपहरण युवती का कोई सुराग लग पाया है।
राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने कहा कि यह केवल एक अपराध नहीं। दलित समाज के खिलाफ सुनियोजित अत्याचार है। सरकार पीड़ितों की आवाज दबाने का काम कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलेगा। बेटी सुरक्षित बरामद नहीं होती, तब तक समाजवादी पार्टी संघर्ष जारी रखेगी।
यह घटना सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव की है। गुरुवार सुबह करीब आठ बजे सुनीता अपनी बेटी रूबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। इसी दौरान गांव का ही रहने वाला पारस अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा और हथियारों के बल पर युवती का अपहरण कर लिया। मां ने जब विरोध किया तो आरोपियों ने उस पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल सुनीता को अस्पताल ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
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विपक्षी नेताओं के संभावित दौरे और बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। गांव की सीमा से करीब ढाई किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग कर दी गई। एसएसपी, एसपी देहात, एसपी ट्रैफिक, चार सीओ, 20 इंस्पेक्टर, 150 दरोगा समेत 500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। आरआरएफ की टीमें भी मौके पर मुस्तैद हैं।