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बागापार–महराजगंज मार्ग पर PWD द्वारा कराए जा रहे पुलिया निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोप से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है। लोगों का कहना है कि निम्न स्तर की ईंटों से हो रहा निर्माण जल्द ही हादसे का कारण बन सकता है। ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध शुरू कर दिया है।
PWD की लापरवाही या भ्रष्टाचार
Maharajganj: जनपद में लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यों की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बागापार से जिला मुख्यालय महराजगंज को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क पर बन रही पुलिया में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। घटिया निर्माण सामग्री और मानकों की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने अब खुलकर विरोध शुरू कर दिया है और पूरे मामले की जांच की मांग की है।
डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के अनुसार, PWD के प्रांतीय खंड द्वारा इस मार्ग पर पुलिया निर्माण कार्य कराया जा रहा है। लेकिन पिछले एक सप्ताह से यहां जिस तरह का काम हो रहा है, वह विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण में बेहद निम्न गुणवत्ता की ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो हाथ लगाने भर से टूट जा रही हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर मौजूद मजदूरों और कर्मचारियों से जब इस संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि निर्माण कार्य में जानबूझकर अनियमितता बरती जा रही है।
लापरवाही सीधे लोगों की जान से खिलवाड़
ग्रामीणों के अनुसार, यदि इसी तरह घटिया सामग्री से पुलिया का निर्माण होता रहा तो यह अधिक दिनों तक टिक नहीं पाएगी और कभी भी हादसे का कारण बन सकती है। यह मार्ग क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से रोजाना सैकड़ों लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में इस तरह की लापरवाही सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है।
अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
रणविजय चौधरी, सुमंत भारती, काशी, प्रेम सागर भारती, सुख सागर, गिरधारी, जगमोहन, अरहंगी, बनारसी गौतम, रामकेवाल भारती, रिंकू गौतम, सुनील गौतम और सुरेंद्र भारती सहित कई ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है कि क्या वह इस मामले में सख्त कदम उठाता है या फिर PWD की यह लापरवाही यूं ही जारी रहेगी।