मंदिरों की आय पर किसका अधिकार? जाने-माने विचारक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने सुझाई ‘हिंदू बोर्ड’ की व्यवस्था

वाराणसी में आयोजित संवाद कार्यक्रम में चिंतक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने मंदिरों की आय और धार्मिक संसाधनों के प्रबंधन पर स्वतंत्र एवं पारदर्शी व्यवस्था की वकालत की। उन्होंने ‘हिंदू बोर्ड’ जैसी व्यवस्था का सुझाव दिया और कहा कि मंदिरों के संसाधनों का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंदों के कल्याण में भी किया जा सकता है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 14 September 2026, 12:04 PM IST
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Varanasi: वाराणसी के सिगरा स्थित एक होटल में मंदिरों की आय, धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता और जरूरतमंद वर्गों के कल्याण से जुड़े विषयों पर विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रखर वक्ता एवं चिंतक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने धार्मिक संसाधनों के प्रबंधन को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मंदिरों से प्राप्त धन पर सरकार का नियंत्रण या उसका सरकारी उपयोग किए जाने के बजाय हिंदू समाज को अपने धार्मिक संसाधनों के लिए स्वतंत्र और पारदर्शी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।

‘हिंदू बोर्ड’ जैसी व्यवस्था की जरूरत

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने धार्मिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए ‘हिंदू बोर्ड’ जैसी व्यवस्था विकसित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके मुताबिक ऐसी व्यवस्था स्वतंत्र होने के साथ-साथ पारदर्शी और जवाबदेह भी होनी चाहिए, ताकि धार्मिक संस्थानों से जुड़े संसाधनों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि मंदिरों और धार्मिक संस्थानों की आय के प्रबंधन में समाज की भागीदारी महत्वपूर्ण है। एक व्यवस्थित तंत्र के जरिए इन संसाधनों का उपयोग बेहतर तरीके से किया जा सकता है।

गरीबों और जरूरतमंदों के लिए हो संसाधनों का इस्तेमाल

कुलश्रेष्ठ ने कहा कि मंदिरों से प्राप्त धन का उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीब परिवारों की सहायता और अन्य सामाजिक कार्यों के जरिए इन संसाधनों को समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की मदद में लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों के संसाधनों का उद्देश्य समाज के प्रति उत्तरदायित्व के साथ तय किया जाना चाहिए, जिससे उसका लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

संवाद कार्यक्रम के दौरान मंदिरों की आय और धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई। पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि धार्मिक संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों जरूरी हैं। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें संसाधनों के उपयोग को लेकर समाज के प्रति उत्तरदायित्व तय हो।

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कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम की अध्यक्षता रोटेरियन सीके त्रिवेदी ने की, जबकि संयोजन रोटेरियन अमित गुप्ता ने किया। इस दौरान सतीशचंद जैन, डॉ. आरके जायसवाल, डॉ. राकेश मोहन, नर्वदानंद दूबे, शैलेन्द्र श्रीवास्तव, वर्षा श्रीवास्तव, नितिन, दीपक माहेश्वरी, सुरेश खंडेलवाल और इंद्रसेन सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

Location :  Varanasi

Published :  14 September 2026, 12:02 PM IST

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