जब सहारे की थी जरुरत तब साधन संपन्न लोगों ने मां और बहनों से कर लिया किनारा, फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन से हुई पहचान

काशी और आसपास के जिलों में 130 लावारिस महिलाओं की पहचान फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन से हुई, लेकिन पहचान सामने आने के बाद भी ज्यादातर परिजनों ने उन्हें अपनाने से इन्कार कर दिया। इनमें पांच महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि 125 महिलाएं अपना घर आश्रम में रह रही हैं।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 1 September 2026, 2:25 PM IST
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Varanasi : काशी और आसपास के जिलों की 130 लावारिस महिलाओं की पहचान फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन के जरिए की गई, लेकिन इसके बावजूद उनके परिजनों ने उन्हें अपनाने से इन्कार कर दिया। इनमें किसी के पिता जमींदार थे तो किसी के पति सरकारी कर्मचारी हैं। इनमें से पांच महिलाओं की गंभीर बीमारियों के चलते छह महीने के भीतर मौत हो चुकी है। फिलहाल 125 महिलाएं सामने घाट स्थित अपना घर आश्रम में रह रही हैं।

पहचान हुई, लेकिन अपनों ने अपनाने से किया इन्कार

आइरिस स्कैन और फिंगरप्रिंट के जरिए इन महिलाओं के आधार कार्ड निकाले गए। आधार से पता मिलने के बाद आश्रम प्रशासन और प्रोबेशन विभाग के अधिकारियों ने उनके परिजनों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने महिलाओं को अपने साथ रखने से साफ इन्कार कर दिया। किसी महिला को संपत्ति के लालच में घर से निकाल दिया गया तो किसी की तबीयत खराब होने के बाद उसे छोड़ दिया गया। मानसिक रूप से परेशान महिलाओं को भी उनके अपनों ने सड़क पर बेसहारा छोड़ दिया। गंगा घाट, बाजार और चौराहों पर मिलने वाली इन महिलाओं को जिला प्रोबेशन विभाग के सहयोग से अपना घर आश्रम पहुंचाया गया।

पिता जमींदार, पति जल निगम में कर्मचारी

45 वर्षीय महिला छह महीने पहले कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल में लावारिस हालत में मिली थी। चार महीने तक आश्रम में इलाज के बाद बायोमेट्रिक के जरिए उसका आधार कार्ड निकाला गया। पता चला कि महिला के पिता चंदौली में जमींदार थे, जबकि वाराणसी निवासी उसका पति जल निगम में कर्मचारी है। पिता की मृत्यु के बाद पति से विवाद हुआ तो महिला ने तलाक ले लिया। मानसिक स्थिति खराब होने के बाद चचेरे भाई ने उसकी जमीन हड़प ली। अब चचेरा भाई भी महिला को अपने साथ रखने के लिए तैयार नहीं है।

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इलाज नहीं कराया, सड़क किनारे छोड़ दिया

चार महीने पहले 75 वर्षीय महिला लावारिस हालत में सड़क किनारे नाले के पास पड़ी मिली थी। बुजुर्ग की तबीयत खराब थी। परिजनों ने उसका इलाज कराने के बजाय उसे छोड़ दिया। अपना घर आश्रम में महिला को दो महीने तक रखा गया और इलाज कराया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। परिजन शव लेने तक नहीं पहुंचे।

सिर में गहरी चोट, घाव में पड़ गए थे कीड़े

45 वर्षीय महिला चोलापुर में सड़क पर अचेत अवस्था में मिली थी। उसके सिर में गहरी चोट थी। इलाज और देखरेख के अभाव में घाव में कीड़े पड़ गए थे। महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ थी। उसे दो महीने तक आश्रम में रखा गया। पहचान होने के बाद जौनपुर में उसके सास-ससुर से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने भी महिला को अपने साथ रखने से इन्कार कर दिया।

काशी घुमाने के बहाने लाया

75 वर्षीय महिला को उसका पौत्र काशी घुमाने के बहाने लेकर आया था। रोडवेज बस स्टैंड के बाहर थोड़ी देर में वापस आने की बात कहकर वह भाग निकला। रोडवेज अधिकारियों ने पुलिस की मदद से महिला को आश्रम पहुंचाया। प्रयागराज में उसके परिजनों से संपर्क किया गया, लेकिन वे महिला को अपने साथ रखने के लिए तैयार नहीं हैं।

महिला आयोग ने जताई सख्ती

राज्य महिला आयोग उपाध्यक्ष चारू चौधरी ने बोला कि मानसिक रूप से अस्वस्थ और बुजुर्ग महिलाओं को घर से बाहर करना गंभीर और अमानवीय है। महिला आयोग इस मामले में सख्त रुख अपनाएगा। जिला प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय कर ऐसे मामलों की जांच कराई जाएगी। जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी होगी। महिलाओं के अधिकारों और भरण-पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही उनकी काउंसिलिंग भी कराई जाएगी।

आश्रम में रहने-खाने की व्यवस्था

अपना घर आश्रम संचालक डॉ. के. निरंजन ने बताया कि अपना घर आश्रम में महिलाओं के रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। सप्ताह में एक दिन आधार कैंप लगाया जाता है। फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन के जरिए 130 महिलाओं के आधार कार्ड निकाले गए। नाम और पता मिलने के बाद परिजनों से संपर्क किया गया, लेकिन उनका सहयोग नहीं मिला। इस बीच पांच महिलाओं की मौत हो गई। ज्यादातर परिजनों ने महिलाओं को अपनाने से इन्कार कर दिया है।

Location :  Varanasi

Published :  1 September 2026, 2:25 PM IST

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