माघ मेला छोड़ने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरकार पर लगातार हमलावार, जानिए अब क्या बोले शंकराचार्य?

माघ मेला विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री से हिंदू और गो-भक्त होने का प्रमाण मांगा है। उन्होंने 40 दिन का अल्टीमेटम देते हुए यूपी से गोमांस निर्यात तत्काल रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि हिंदू होने का प्रमाण दें या फिर गेरुआ वस्त्र त्यागें।

Updated : 30 January 2026, 4:46 PM IST
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Varanasi: प्रयागराज माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चला आ रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मेला छोड़ने के बाद शंकराचार्य लगातार सरकार पर हमलावर हैं। शुक्रवार को वाराणसी में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को लेकर कड़े बयान दिए, जिससे सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

'शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया'

वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि माघ मेला प्रशासन की ओर से उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण पत्र तक मांगा गया था। उन्होंने कहा, "मैंने वह प्रमाण दे दिया। मेरे प्रमाण सच्चे थे, इसलिए उन्हें मानना पड़ा। अब प्रमाण मांगने का समय पीछे छूट गया है।" इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से उनके हिंदू होने का प्रमाण देने की मांग कर डाली।

शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब गेंद सरकार के पाले में है और मुख्यमंत्री को अपने आचरण से यह साबित करना होगा कि वे वास्तव में हिंदू हैं।

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40 दिन का अल्टीमेटम, 'गो-भक्ति' का सबूत मांगा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री को 40 दिन का समय देते हुए कहा कि इस अवधि में उन्हें अपने गो-भक्त होने का प्रमाण देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि यह प्रमाण नहीं दिया गया, तो माना जाएगा कि मुख्यमंत्री "नकली हिंदू, छद्म हिंदू, कालनेमि, पाखंडी और ढोंगी" हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केवल दिखावे के लिए गेरुआ वस्त्र धारण किए गए हैं, जबकि वास्तविक नीतियां हिंदू भावनाओं के अनुरूप नहीं हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

गोहत्या और गोमांस निर्यात पर सवाल

शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री के साथ-साथ जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों इस समय गोहत्या बंदी की मांग करने वाले संतों और संगठनों पर तरह-तरह के हमले कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत से होने वाले कुल गोमांस निर्यात का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश से होता है। "लगभग आधा निर्यात यूपी से हो रहा है। उन्होंने कहा, अगर सरकार वास्तव में गो-रक्षा के पक्ष में है, तो तत्काल उत्तर प्रदेश से गोमांस का निर्यात रोका जाना चाहिए।” शंकराचार्य ने दो टूक शब्दों में कहा कि या तो हिंदू होने का प्रमाण दिया जाए या फिर भगवा चोला उतार दिया जाए।

दिल्ली नहीं, अब लखनऊ में संतों की महापंचायत

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी बताया कि वे पहले दिल्ली जाने वाले थे और इसके लिए कम्प्यूटर बाबा ने उन्हें आमंत्रित भी किया था। हालांकि अब योजना में बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि 10-11 मार्च को लखनऊ में सभी संत-महंत और आचार्यों की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी।

इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि "कौन हिंदू है, कौन हिंदू हृदय सम्राट है और किसे छद्म या नकली हिंदू घोषित किया जाना चाहिए।" उन्होंने संकेत दिए कि यह निर्णय आगे की धार्मिक और सामाजिक रणनीति की दिशा तय करेगा।

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शंकराचार्य के इन बयानों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक विमर्श में तीखापन आना तय माना जा रहा है। माघ मेला विवाद अब केवल प्रशासनिक मुद्दा न रहकर हिंदू पहचान, गो-रक्षा और सत्ता के दावों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और लखनऊ में प्रस्तावित संत सम्मेलन पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

Location : 
  • Varanasi

Published : 
  • 30 January 2026, 4:46 PM IST

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