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उत्तर प्रदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े कोड C27-95375 के दस्तावेजों में करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन का खुलासा हुआ। 31 जनवरी 2025 तक शेष देनदारी 1.27 करोड़ रुपये दर्ज। मामले ने मठ प्रशासन और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।
झूंसी मठ से जुड़े बड़े वित्तीय दस्तावेजों का खुलासा (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Prayagraj: उत्तर प्रदेश में झूंसी स्थित मठ से जुड़े स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हाल ही में आशुतोष महाराज ने स्वामी से जुड़े करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन का खुलासा किया है। इस खुलासे के केंद्र में कोड C27-95375 से जुड़े दस्तावेज हैं, जिनमें बड़ी रकम, देनदारियां और अंतिम बकाया शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, 31 जनवरी 2025 तक शेष देनदारी 1.27 करोड़ रुपये दर्ज की गई है।
दस्तावेजों में शुरुआती राशि केवल 4,998 रुपये दर्ज है, जबकि आधार राशि 5 लाख बताई गई है। आगे चलकर लेन-देन की बड़ी रकम जैसे 7,06,50,000, 1,45,00,000, 92,00,000 और 29,00,000 रुपये का उल्लेख है। इन आंकड़ों को मिलाकर ट्रांजैक्शन का दायरा कई करोड़ रुपये तक पहुंचता दिखाई देता है।
लेन-देन का यह दौर 15 मई 2024 से 15 मई 2025 के बीच हुआ। दस्तावेजों में कुल देनदारी का संदर्भ 2 करोड़ रुपये के रूप में दर्ज है। इसके अलावा 3 करोड़ रुपये की FAC व्यवस्था का भी उल्लेख है, जिसमें 1.50 प्रतिशत की दर से किस्तों में भुगतान की शर्त दर्ज है। संबंधित तारीख 26 दिसंबर 2024 बताई गई है।
एक अन्य प्रविष्टि में 5 लाख मूल्य के वाहन के लिए 15 महीने में कुल देय राशि 10,15,000 रुपये दर्ज है, जो ब्याज या अन्य शुल्क के कारण लगभग दोगुनी हो गई।
दस्तावेजों में 31 जनवरी 2025 तक दर्ज राशियां 105,000, 40,60,001, 29,00,001, 1,30,000 और 10,00,179 रुपये बताई गई हैं। अंतिम बकाये के हिसाब से 1,41,91,000 रुपये में से 14,50,000 घटाने के बाद शेष देनदारी 1,27,41,000 रुपये है।
रिपोर्ट में मठ के वित्तीय मामलों का संचालन करने वाले CEO प्रकाश उपाध्याय का भी जिक्र है। हालांकि अभी तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद या उनके प्रतिनिधियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह मामला सामने आने के बाद मठ की वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। आशुतोष महाराज के खुलासे ने यह भी संकेत दिया कि कोड C27-95375 में दर्ज लेन-देन का दायरा और वित्तीय ब्योरा सार्वजनिक जांच का विषय बन सकता है।
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जानकारों का मानना है कि अगर मामले में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो यह न केवल स्वामी की छवि बल्कि मठ के प्रशासनिक मामलों पर भी प्रभाव डाल सकता है। कानूनी और वित्तीय दृष्टिकोण से मामले की गहन जांच की आवश्यकता जताई जा रही है।