Prayagraj: चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर कोर्ट सख्त, सरकार से किया जवाब तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर सरकार को खरी खोटी सुनाई। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने यह आदेश देवरिया निवासी अधिवक्ता प्रदीप पांडे की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 22 March 2026, 7:26 AM IST
google-preferred

प्रयागराज:  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर रोक को लेकर सरकार को खरी खोटी सुनाई। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने यह आदेश देवरिया निवासी अधिवक्ता प्रदीप पांडे की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में चाइनीज मांझा खुलेआम बेचा जा रहा है। इससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।

हाईकोर्ट ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता को सरकार से एक महीने में निर्देश प्राप्त कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने यह आदेश देवरिया निवासी अधिवक्ता प्रदीप पांडे की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है। इसमें गृह विभाग के प्रमुख सचिव और डीजीपी को पक्षकार बनाया गया है।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद खुलेआम बिक रहा मांझा

हाईकोर्ट ने 2015 में जनहित याचिका अनुराग मिश्रा बनाम राज्य मामले में चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए थे। 14 जनवरी 2026 को एक और जनहित याचिका हिमांशु श्रीवास्तव बनाम राज्य में भी कोर्ट ने पुराने आदेशों को दोहराते हुए सख्ती से पालन कराने के लिए कहा था। इसके बावजूद प्रतिबंधित मांझा खुलेआम बिक रहा है।

मुजफ्फरनगर में लाखों की अवैध स्मैक बरामद, 2 गिरफ्तार

याची की दलील

याची ने दलील दी है कि अधिकारियों की लापरवाही और आदेशों की अवहेलना से कई घटनाएं हो चुकी हैं। 22 जनवरी 2026 को प्रयागराज में गले में मांझा फंसने से अधिवक्ता अनूप श्रीवास्तव घायल हो गए थे। जौनपुर, उन्नाव, मेरठ और लखनऊ सहित कई जिलों में एक साल में कई लोगों की मौत और कई के घायल होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

रोहित शेट्टी फायरिंग केस में बड़ा खुलासा, यूपी से पकड़ा गया 14 वां आरोपी, अब सामने आएगा असली राज

अधिवक्ता ने दलील दी कि यह मांझा न सिर्फ दुकानों पर, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी आसानी से उपलब्ध है। यह अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने याची को निर्देश दिया है कि वे 48 घंटे के भीतर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को याचिका की प्रति उपलब्ध कराएं। एक माह बाद अगली सुनवाई होगी।

 

Location : 
  • Prayagraj

Published : 
  • 22 March 2026, 7:26 AM IST

Advertisement