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इलाहाबाद हाईकोर्ट
Prayagraj : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी आरोपी को खुद को बेगुनाह साबित करने का पूरा कानूनी अधिकार है। अगर आरोपी अपने बचाव में किसी गवाह को बुलाना चाहता है तो अदालत उसकी मांग सिर्फ इस आधार पर खारिज नहीं कर सकती कि इससे मुकदमे में देरी होगी।
न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने कहा कि जब तक यह साबित न हो जाए कि आरोपी जानबूझकर मुकदमे को लंबा खींचने के लिए ऐसा कर रहा है। तब तक उसकी अर्जी खारिज नहीं की जा सकती।
यह मामला रामपुर जिले के स्वार थाना क्षेत्र का है। 26 जुलाई 2016 की रात हुई हत्या के मामले में अगले दिन इंद्रपाल सिंह को आरोपी बनाया गया था। हालांकि, आरोपी का दावा था कि घटना के समय वह भारत में मौजूद ही नहीं था। उसके मुताबिक वह 26 जुलाई को फ्लाइट से बैंकॉक (थाईलैंड) चला गया था और 30 जुलाई को वापस लौटा था।
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अपने दावे को साबित करने के लिए इंद्रपाल सिंह ने कोर्ट में पासपोर्ट पर लगी विदेश जाने और वापस आने की मोहरें पेश कीं। इसके अलावा थाईलैंड में खरीदारी की रसीदें भी दाखिल कीं। आरोपी ने कहा कि इन दस्तावेजों की सच्चाई साबित करने के लिए पासपोर्ट कार्यालय देहरादून और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के अधिकारियों की गवाही जरूरी है।
रामपुर की सत्र अदालत ने आरोपी की इस मांग को 2 जून 2025 को खारिज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट का कहना था कि इससे मुकदमे में देरी होगी। इसके बाद आरोपी ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि हत्या जैसे गंभीर मामलों में आरोपी को अपने बचाव में गवाह और सबूत पेश करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने आरोपी को 15 दिन के भीतर नई अर्जी दाखिल करने की अनुमति दी है और ट्रायल कोर्ट को उस पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया है।
इस फैसले से अदालत किसी आरोपी को अपने बचाव का मौका देने से इनकार नहीं कर सकती। अगर आरोपी के पास खुद को निर्दोष साबित करने के लिए जरूरी सबूत या गवाह हैं, तो उन्हें पेश करने का मौका मिलना चाहिए।
Location : Prayagraj
Published : 17 May 2026, 6:49 PM IST