मुजफ्फरनगर में प्राचीन शिव मंदिर की जमीन पर विवाद, संजीव भारद्वाज ने की कार्रवाई की मांग

मुजफ्फरनगर के रोहाना खुर्द गांव में प्राचीन शिव मंदिर की भूमि को लेकर विवाद गरमा गया है। भाकियू टिकैत के नेता संजीव भारद्वाज ने कथित तौर पर गलत दस्तावेजों के आधार पर जमीन नाम दर्ज कराने का आरोप लगाया है। एसडीएम सदर कार्यालय में मामले को उठाते हुए उन्होंने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 27 October 2026, 10:27 PM IST
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Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में रोहाना खुर्द गांव स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर की भूमि को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के सहारनपुर मंडल सचिव संजीव भारद्वाज ने मंदिर की जमीन के अभिलेखों में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि मंदिर की भूमि को गलत दस्तावेजों के आधार पर एक व्यक्ति के नाम दर्ज कराया गया था। मामले की जांच एसडीएम सदर को सौंपी गई थी। अब राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाम को लेकर संबंधित पक्षों से जवाब मांगे जाने की बात सामने आई है।

2012 से चल रहा है मंदिर की जमीन का विवाद

मुजफ्फरनगर की सदर तहसील स्थित एसडीएम सदर कार्यालय पहुंचे संजीव भारद्वाज ने मीडिया से बातचीत में बताया कि रोहाना खुर्द गांव में एक प्राचीन शिव मंदिर है, जिसकी भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। उनके आरोप के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के जिला सचिव रह चुके हरेंद्र सैनी ने कथित तौर पर क्रय-विक्रय से संबंधित गलत दस्तावेज तैयार कराकर मंदिर की भूमि अपने नाम दर्ज करा ली थी।

SDM तक पहुंचा मामला (Image Source: Dynamite News)

भारद्वाज ने बताया कि इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी कार्यालय में की गई थी। शिकायत में भूमि संबंधी दस्तावेजों में नाम दर्ज किए जाने पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद मामले की जांच एसडीएम सदर को सौंपी गई। उन्होंने दावा किया कि जांच में अभिलेखों में दर्ज नाम को गलत पाया गया है।

धारा 38 के तहत कार्रवाई

संजीव भारद्वाज के मुताबिक, मामले में धारा 38 के तहत कार्रवाई करते हुए प्रतिवादियों से जवाब मांगा गया है। प्रशासन की ओर से संबंधित पक्षों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि भूमि के अभिलेखों में उनका नाम किस आधार पर दर्ज हुआ। अब इस मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और प्रशासनिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

भारद्वाज ने मंदिर को करीब 1300 वर्ष पुराना बताते हुए कहा कि उनके पास पुराने उर्दू दस्तावेज मौजूद हैं। उनका दावा है कि इन दस्तावेजों में शिव मंदिर का उल्लेख मिलता है। उन्होंने इन अभिलेखों को मंदिर की ऐतिहासिक पहचान और भूमि से जुड़े विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। हालांकि, दस्तावेजों की वास्तविक अवधि, प्रमाणिकता और भूमि पर उनके कानूनी प्रभाव की पुष्टि संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठाए सवाल

भाकियू नेता ने कहा कि वर्ष 2012 से चल रहे इस विवाद पर जिले के जनप्रतिनिधियों को ध्यान देना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर की भूमि से जुड़े मामले में अपेक्षित पहल नहीं हुई। भारद्वाज ने जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय और जिला जज के स्तर पर मामले से संबंधित कार्यवाही का भी जिक्र किया और प्रशासन से पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेने की मांग की।

उन्होंने कहा कि मामले में किसी तरह का अनुचित दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए और कार्रवाई तथ्यों तथा दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए। मंदिर की भूमि से जुड़े आरोपों पर अब प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब, दस्तावेजों का सत्यापन और प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए जरूरी है।

Location :  Muzaffarnagar

Published :  27 October 2026, 10:27 PM IST

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