संविधान और बाल संरक्षण पर शिक्षकों की ट्रेनिंग, दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

हाथरस के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में विधिक साक्षरता क्लब के नोडल शिक्षकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रशिक्षण के प्रथम दिन पहले चरण में 37 विद्यालयों के शिक्षक-प्रभारियों को नोडल शिक्षक के रूप में नामित कर प्रशिक्षित किया गया।

Updated : 27 October 2026, 9:37 PM IST
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हाथरस: उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों पर जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-तृतीय के आदेशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनु चौधरी की उपस्थिति में जनपद न्यायालय, हाथरस के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में विधिक साक्षरता क्लब के नोडल शिक्षकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इसका उद्देश्य जिले के शासकीय एवं अशासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित विधिक साक्षरता क्लबों को सक्रिय बनाना और विद्यार्थियों को उनके संवैधानिक अधिकारों एवं कानूनी दायित्वों के प्रति जागरूक करना है।

प्रशिक्षण के प्रथम दिन पहले चरण में 37 विद्यालयों के शिक्षक-प्रभारियों को नोडल शिक्षक के रूप में नामित कर प्रशिक्षित किया गया। ये शिक्षक विद्यालयों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच समन्वय स्थापित करते हुए कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए संवैधानिक जागरूकता अभियान चलाएंगे।

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संविधान से लेकर बाल संरक्षण कानूनों तक दी गई जानकारी

प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू चंद्रा, सिविल जज (जू.डि.)/एफटीसी द्वितीय अरिजीत सिंह तथा सिविल जज (जू.डि.)/एफटीसी प्रथम रोबिन कुमार ने संविधान निर्माण, प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों, संवैधानिक उपचार, राज्य के नीति निदेशक तत्वों और मौलिक कर्तव्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संविधान सभा ने दो वर्ष, 11 महीने और 18 दिन के परिश्रम के बाद संविधान तैयार किया। अनुच्छेद 32 और 226 के माध्यम से नागरिक मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर क्रमशः सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की शरण ले सकते हैं। साथ ही अधिकारों के साथ कर्तव्यों के पालन का महत्व भी समझाया गया।

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द्वितीय सत्र में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल ऋतुराज सिंह और असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल आशुतोष गौतम ने विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका की भूमिका के साथ पॉक्सो एक्ट, बाल विवाह निषेध कानून और बाल श्रम उन्मूलन अधिनियम की जानकारी दी।

कानूनी समझ विकसित

तृतीय सत्र में मध्यस्थ अधिवक्ता रमेश चंद्र वर्मा और संदीप वर्मा ने निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत तथा कमजोर वर्गों को मिलने वाली कानूनी सुविधाओं के बारे में बताया। उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सहायता हेल्पलाइन 15100 की जानकारी देते हुए शिक्षकों से इसे विद्यार्थियों के माध्यम से आमजन तक पहुंचाने की अपील की। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में कानूनी समझ विकसित कर उन्हें जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।

Location :  हाथरस

Published :  27 October 2026, 9:37 PM IST

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