‘अधिकारी मस्त, जनता पस्त’: मझवा में संचारी अभियान को ठेंगा, 500 मीटर जलमग्न रास्ते से ग्रामीण परेशान

मिर्जापुर के मझवा ब्लॉक अंतर्गत मोहम्मदपुर गांव के पिपरिया माजरा में भारी जलजमाव से लोग परेशान हैं। 500 मीटर रास्ता जलमग्न होने और मच्छरों के प्रकोप से संचारी अभियान की पोल खुल गई है। BDO से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

Updated : 28 July 2026, 8:30 AM IST
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Mirzapur: जनपद के मझवा ब्लॉक अंतर्गत आने वाले मोहम्मदपुर गांव (महामलपुर ग्राम सभा) का पिपरिया माजरा आज सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के फासले की जीती-जागती तस्वीर बना हुआ है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं भले ही आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का ढिंढोरा पीटती हों, लेकिन पिपरिया बिंद बस्ती में हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। गांव के लोग पिछले काफी समय से गंभीर जलजमाव और मच्छरों के भयंकर प्रकोप से जूझ रहे हैं, जिसने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है।

संचारी अभियान को ठेंगा, मच्छरों का बढ़ा प्रकोप

एक तरफ जहां प्रदेश सरकार बीमारियों पर लगाम लगाने के लिए विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ पिपरिया माजरा में जिम्मेदार अधिकारी इन अभियानों को ठेंगा दिखा रहे हैं। जलजमाव की वजह से पैदा हो रहे मच्छरों के प्रकोप ने पूरी बस्ती को बीमारियों की चपेट में आने की कगार पर खड़ा कर दिया है। ग्रामीण बदहाली के साए में रहने को मजबूर हैं, लेकिन ग्राम पंचायत अधिकारी की लापरवाही से अभियान सिर्फ कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है।

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500 मीटर तक जलमग्न रास्ता, विकास का भारी बजट गायब

महामलपुर ग्राम सभा एक बड़ी ग्राम सभा होने के नाते विकास कार्यों के लिए भारी-भरकम बजट और संसाधनों से लैस है। बजट की कोई कमी न होने के बावजूद, अगर जमीनी विकास देखना हो तो पिपरिया मोहल्ले का रुख करना पड़ेगा। यहां 500 मीटर से भी अधिक लंबा रास्ता पूरी तरह जलमग्न है। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि अगर विकास वास्तव में हुआ है, तो वह केवल ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी का हुआ है, न कि इस उपेक्षित मोहल्ले का।

शिकायतों का पुलिंदा और डायरी बंद करने का खेल

समस्या से तंग आकर ग्रामीणों ने मझवा ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अमित मिश्रा से मामले की सीधी शिकायत की। अधिकारी ने शिकायत सुनते ही अपने मातहतों को मामले को डायरी में नोट करने का निर्देश तो दे दिया, लेकिन डायरी बंद होते ही कार्यवाही भी वहीं ठप हो गई। यहीं से शुरू होता है प्रधान और सचिव की कार्यशैली का असली खेल, जहां पन्नों में दर्ज शिकायतें कभी समाधान तक नहीं पहुंच पातीं।

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'सेटिंग' के खेल में मुख्य सड़क पर ही सिमट जाती है जांच

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि गांव के विकास में बड़े ही नियोजित तरीके से धांधली की जा रही है। जब भी कोई उच्च अधिकारी जांच के सिलसिले में गांव पहुंचता है, तो मातहत कर्मचारी पहले से ही 'सेटिंग' का खेल पूरा कर लेते हैं। जांच के नाम पर अधिकारी केवल मुख्य सड़क के किनारे का मुआयना करके लौट जाते हैं, जबकि अंदरूनी पिपरिया बिंद बस्ती की मुख्य समस्या से आंखें मूंद ली जाती हैं। आलम यह है कि अधिकारी और कर्मचारी मस्त हैं, जबकि जनता जलभराव की समस्या से पूरी तरह पस्त हो चुकी है।

Location :  Mirzapur

Published :  28 July 2026, 8:30 AM IST

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