यूपी पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर रोक, कोर्ट के फैसले के बाद जानिये क्या होगा आगे

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव में देरी के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने चुनाव टालने वाले सरकारी आदेशों को असंवैधानिक बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी, जहां चुनाव की समय सीमा और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को लेकर स्थिति साफ होगी।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 26 June 2026, 6:23 PM IST
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Prayagraj: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को कड़ा संदेश दिया है। पंचायत चुनाव में देरी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन सरकारी आदेशों को गैर-मौजूद यानी असंवैधानिक करार दिया है, जिनके आधार पर चुनाव टाले गए थे। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए साफ कहा कि पंचायतों का कार्यकाल संविधान के अनुसार तय होता है और चुनाव समय पर कराना जरूरी है। कोर्ट के इस रुख के बाद पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

चुनाव टालने वाले आदेशों पर उठे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 25 मई 2026 और 26 मई 2026 को जारी सरकारी आदेशों पर सवाल उठाए। इन आदेशों के जरिए पंचायत चुनाव को आगे बढ़ाया गया था। अदालत ने कहा कि ये आदेश अधिनियम, 1947 की धारा 12 (3-ए) के तहत जारी किए गए थे, जबकि इसी प्रावधान को पहले ही हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा ‘प्रमोद लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है। कोर्ट ने कहा कि जब कोई प्रावधान पहले ही असंवैधानिक घोषित हो चुका है तो उसके आधार पर आदेश जारी करना उचित नहीं माना जा सकता।

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संविधान के अनुसार पांच साल में चुनाव जरूरी

हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 243 ई और 243 (के) का हवाला देते हुए कहा कि पंचायतों का कार्यकाल पांच साल का निश्चित होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव समय पर कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था का जरूरी हिस्सा है। चुनाव में अनावश्यक देरी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्थानीय निकायों की व्यवस्था को लंबे समय तक प्रशासकों के सहारे नहीं चलाया जा सकता।

ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

राज्य सरकार की ओर से चुनाव में देरी का कारण ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होना बताया गया। इस पर कोर्ट ने हैरानी जताई। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद आयोग ने अब तक अपनी रिपोर्ट क्यों नहीं सौंपी, यह गंभीर विषय है। कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में स्पष्ट जानकारी मांगी है कि रिपोर्ट कब तक आएगी और चुनाव कराने की प्रक्रिया कब शुरू होगी।

राज्य चुनाव आयोग ने रखी अपनी स्थिति

सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित हो चुकी है। आयोग ने कहा कि वह चुनाव कराने के लिए तैयार है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से जरूरी संसाधन और लॉजिस्टिक सपोर्ट नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस बयान के बाद कोर्ट ने सरकार से चुनाव को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

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प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने से इनकार

हाईकोर्ट ने पंचायतों में प्रधानों को प्रशासक के रूप में जारी रखने के फैसले पर भी सहमति नहीं जताई। अदालत ने कहा कि पंचायतों का संचालन संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार होना चाहिए और निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह लंबे समय तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं चलाई जा सकती।

सरकार को अंतिम मौका, नहीं तो होगी कार्रवाई

कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस हलफनामे में सरकार को ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की स्थिति और पंचायत चुनाव कराने की स्पष्ट समय सीमा बतानी होगी। अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार तय समय पर जवाब नहीं देती है तो संबंधित अधिकारी, जिन्होंने 25 मई 2026 का आदेश जारी किया था, उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा।

13 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को दोपहर दो बजे होगी। सभी की निगाहें अब सरकार के जवाब और हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर अगली सुनवाई में बड़ा फैसला आ सकता है।

Location :  Prayagraj

Published :  26 June 2026, 6:12 PM IST

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