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महाराजगंज के नौतनवा तहसील में एसआईआर जनसुनवाई के दौरान अधिवक्ता और पूर्ति निरीक्षक के बीच हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया। पूर्ति निरीक्षक की तहरीर पर अधिवक्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने से वकील आक्रोशित हो गए और तहसील परिसर में नारेबाजी की।
तहसील परिसर में जमकर अधिवक्ताओं ने की नारेबाजी
Maharajganj: महराजगंज जिले के नौतनवा तहसील में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के तहत नो-मैपिंग मतदाताओं के लिए लगाए गए जनसुनवाई केंद्र पर शुरू हुआ विवाद अब बड़े प्रशासनिक और कानूनी टकराव का रूप ले चुका है। अधिवक्ता और पूर्ति निरीक्षक के बीच हुए विवाद के बाद जब पूर्ति निरीक्षक की तहरीर पर एक अधिवक्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, तो इससे अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, मुकदमे की जानकारी मिलते ही नौतनवा तहसील के अधिवक्ता लामबंद हो गए और तहसील परिसर में जमकर नारेबाजी की। अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना निष्पक्ष जांच के अधिवक्ता को आरोपी बनाया गया है। वकीलों ने मांग की कि जिस प्रकार पूर्ति निरीक्षक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया, उसी प्रकार अधिवक्ता की तहरीर पर भी तत्काल कार्रवाई हो।
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कथित रूप से पीड़ित अधिवक्ता राजन ने बताया कि एसआईआर नो-मैपिंग जनसुनवाई के दौरान वह एक महिला के दस्तावेजों की जांच कराने के लिए पूर्ति निरीक्षक के पास गए थे। उन्होंने अनुरोध किया था कि दस्तावेज देख लिए जाएं ताकि महिला लाइन में आ सके। आरोप है कि इस पर पूर्ति निरीक्षक ने अभद्र व्यवहार किया, अपशब्द कहे और दस्तावेज फेंक दिए। अधिवक्ता का कहना है कि इस दौरान उनके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमान किया गया। उन्होंने अपनी तहरीर पर भी मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने पूर्ति निरीक्षक हर्षवर्धन श्रीवास्तव पर राशन कार्ड बनाने, नाम जोड़ने-घटाने और संशोधन के नाम पर कथित अवैध वसूली करने के आरोप लगाए। अधिवक्ताओं का कहना है कि पूर्ति निरीक्षक का आम जनता और अधिवक्ताओं से अभद्र व्यवहार करना आम बात हो गई है, जिसकी कई बार शिकायतें भी की जा चुकी हैं।
बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना तहसील सभागार के भीतर उस समय हुई, जब मौके पर नौतनवा एसडीएम भी मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले कहासुनी हुई, फिर धक्का-मुक्की तक नौबत आ गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद मामला और भी संवेदनशील हो गया। कर्मचारियों, अधिकारियों और अन्य अधिवक्ताओं ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया।
फिलहाल, अधिवक्ता संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर मामले में निष्पक्ष जांच कर दोनों पक्षों पर समान कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।