महराजगंज में 20 लाख की बैंक धोखाधड़ी पर कोर्ट सख्त, पुलिस को FIR दर्ज कर CO से जांच कराने का आदेश

महराजगंज में अनपढ़ वृद्धा के बैंक खाते से पैतृक जमीन के 20 लाख रुपये धोखाधड़ी कर निकालने और विरोध करने पर मारपीट व जातिसूचक शब्द कहने के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 11 August 2026, 7:26 PM IST
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Maharajganj: पैतृक जमीन बेचकर बैंक खाते में जमा किए गए 20 लाख रुपये कथित रूप से धोखाधड़ी कर निकालने और रकम मांगने पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए मारपीट व जान से मारने की धमकी देने के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए थाना चौक पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही मामले की विवेचना संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारी से कराने के निर्देश दिए गए हैं।

वृद्ध और अनपढ़ महिला के खाते से रकम निकालने का आरोप

मामला चौक थाना क्षेत्र का बताया गया है। प्रार्थी के अनुसार उसकी माता ने पैतृक जमीन बेचकर प्राप्त 20 लाख रुपये भारतीय स्टेट बैंक, दरहटा स्थित खाते में जमा किए थे। आरोप है कि पारिवारिक संबंधों का फायदा उठाते हुए विपक्षी कृपाशंकर ने जमीन दिलाने का झांसा देकर सितंबर 2025 में प्रार्थी की वृद्ध और अनपढ़ माता का अंगूठा लगवाया और कथित तौर पर उनके खाते से पूरी रकम निकाल ली।

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रुपये वापस मांगने पर मारपीट

प्रार्थी का आरोप है कि जब उसने 7 जून 2026 की सुबह करीब आठ बजे आरोपियों से रुपये के संबंध में जानकारी मांगी और रकम वापस करने की बात कही तो सभी विपक्षी एक राय होकर उसके साथ अभद्रता करने लगे। आरोप है कि उसे जातिसूचक शब्द कहे गए, गाली-गलौज की गई और लात-घूंसों तथा जूतों से मारपीट की गई। शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव कर उसकी जान बचाई। आरोप है कि जाते समय विपक्षियों ने जान से मारने की धमकी भी दी।

कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेज

प्रार्थी ने न्यायालय में अपने आरोपों के समर्थन में पुलिस अधीक्षक महराजगंज को दिए गए प्रार्थना पत्र की छायाप्रति, जाति प्रमाण पत्र, रजिस्ट्री की मूल रसीद, आधार कार्ड और बैंक स्टेटमेंट समेत अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। बैंक स्टेटमेंट में खाते से रुपये निकाले जाने से संबंधित विवरण भी दर्ज होने का उल्लेख न्यायालयी आदेश में किया गया है।

पुलिस रिपोर्ट में मुकदमा दर्ज नहीं होने की बात सामने आई

मामले में थाना चौक से आख्या भी तलब की गई थी। पुलिस की रिपोर्ट में बताया गया कि स्थानीय थाने के अभिलेखों के अवलोकन से इस संबंध में कोई अभियोग पंजीकृत नहीं पाया गया। न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध दस्तावेजों और प्रार्थी के अधिवक्ता के तर्कों का परिशीलन करने के बाद कहा कि मामला प्रार्थी की अनपढ़ वृद्ध माता के बैंक खाते से 20 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी से निकासी से जुड़ा है। उपलब्ध बैंक स्टेटमेंट और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए मामले की गहन जांच आवश्यक है।

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रामबाबू गुप्ता और सुखवासी मामले के फैसलों का भी दिया हवाला

न्यायालय ने प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपराध का गठन होना मानते हुए धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया। आदेश में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित रामबाबू गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य तथा सुखवासी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामलों में व्यक्त विधि व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।

थाना प्रभारी को FIR दर्ज कर विवेचना कराने के निर्देश

न्यायालय ने प्रभारी निरीक्षक थाना चौक को प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों के आधार पर मुकदमा पंजीकृत कराने तथा संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारी से मामले की विवेचना सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। साथ ही विवेचना के परिणाम से न्यायालय को अवगत कराने को कहा गया है।

Location :  Maharajganj

Published :  11 August 2026, 7:26 PM IST

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