क्या आपकी घरवाली और राजा बेटा भी रात को सोते वक्त चलाते है रील्स? तो अपनाएं यह ट्रिक

मोबाइल और रील्स की बढ़ती लत के बीच KGMU के आयुष विभाग प्रभारी डॉ. सुनीत कुमार मिश्रा ने एक पारंपरिक तरीके का दावा किया है। उनका कहना है कि मोबाइल कवर में बिल्वपत्र, पीपल या तुलसी का पत्ता रखने से रेडिएशन का असर कम हो सकता है। फोन इस्तेमाल करने की आदत पर भी नियंत्रण में मदद मिल सकती है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 13 August 2026, 6:41 PM IST
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Lucknow: मोबाइल फोन और रील्स की लत अब सिर्फ समय बर्बाद करने की आदत नहीं रह गई है। कई लोग घंटों स्क्रीन से चिपके रहते हैं और फोन दूर होते ही बेचैनी महसूस करने लगते हैं। इसी समस्या को लेकर लखनऊ की King George's Medical University (KGMU) के आयुष विभाग में हर महीने करीब 12 से 15 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। विभाग प्रभारी डॉ. सुनीत कुमार मिश्रा के मुताबिक, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में मोबाइल और रील्स की लत के मामले सामने आ रहे हैं।

फोन कवर में पत्ते रखने का दावा

डॉ. सुनीत कुमार मिश्रा का दावा है कि मोबाइल के कवर में बिल्वपत्र, पीपल या तुलसी का पत्ता रखने से मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन का असर कम हो सकता है। उनका कहना है कि इस तरह के पारंपरिक तरीकों को काउंसलिंग और दूसरी उपचार पद्धतियों के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके मुताबिक, इससे मोबाइल चलाने और लगातार रील्स देखने की आदत कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इसे एक तरह की थेरेपी बताते हुए कहा कि इस विषय पर हाई लेवल रिसर्च भी चल रही है।

मोबाइल एडिक्शन को मनोरोग से जोड़कर देखा जा रहा

डॉ. मिश्रा के अनुसार, मोबाइल को जरूरत से ज्यादा देखने की आदत व्यक्ति की एकाग्रता और मानसिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। आयुर्वेदिक उपचार में ब्राह्मी, अश्वगंधा और जटामांसी जैसी औषधियों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, किसी भी औषधि का सेवन विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करने की बात कही गई है।

रोज 8 से 10 घंटे स्क्रीन देख रहे मरीज

विभाग में आने वाले कई मरीज शुरुआत में बेचैनी और मानसिक अस्थिरता जैसी शिकायतें बताते हैं। बातचीत के दौरान सामने आता है कि वे कई घंटे मोबाइल पर रील्स या सीरियल देखते हैं। डॉ. मिश्रा के मुताबिक, कुछ मरीज रोजाना 8 से 10 घंटे तक स्क्रीन पर रहते हैं। इनमें पाकिस्तानी सीरियल और रील्स देखने की आदत वाले मरीज भी शामिल हैं।

स्क्रीन टाइम कम करना भी जरूरी

डॉ. मिश्रा का कहना है कि सिर्फ किसी पारंपरिक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय मोबाइल इस्तेमाल का समय सीमित करना जरूरी है। बच्चों के स्क्रीन टाइम पर परिवार को नजर रखनी चाहिए। सोने से पहले फोन से दूरी, पढ़ाई या काम के दौरान मोबाइल को अलग रखना और जरूरत के हिसाब से स्क्रीन इस्तेमाल करना आदत सुधारने में मदद कर सकता है।

विशेषज्ञ की सलाह के बिना इलाज न करें

मोबाइल एडिक्शन के इलाज का तरीका हर व्यक्ति की स्थिति के हिसाब से अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक औषधि या उपचार को खुद से शुरू करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। साथ ही, बिल्वपत्र, पीपल या तुलसी के पत्ते से मोबाइल रेडिएशन कम होने के दावे को फिलहाल विशेषज्ञों और वैज्ञानिक शोध के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

Location :  Lucknow

Published :  13 August 2026, 6:40 PM IST

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