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महराजगंज जिले के पुरंदरपुर थाना क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामसभा की बंजर और नवीन परती भूमि पर पक्का निर्माण कराए जाने की शिकायत पर हल्का लेखपाल की तहरीर के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। पुरंदरपुर पुलिस ने सात नामजद आरोपियों के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुरंदरपुर थाना क्षेत्र
Maharajganj: जिला के पुरंदरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम ताल्ही में सरकारी अभिलेखों में दर्ज सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया। आरोप है कि ग्रामसभा की बंजर श्रेणी की भूमि तथा नवीन परती भूमि पर कुछ लोगों द्वारा पक्का निर्माण कराया जा रहा था। यह भूमि राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से सरकारी दर्ज है, इसके बावजूद कब्जाधारियों द्वारा निर्माण कार्य जारी रखा गया।
हल्का लेखपाल द्वारा कई बार निर्माण रोकने और भूमि खाली करने की चेतावनी दी गई, लेकिन आरोपितों ने इसे अनदेखा किया और निर्माण कार्य नहीं रोका। मामला बढ़ता देख लेखपाल ने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से की।
सूचना के अनुसार, ग्राम ताल्ही के हल्का लेखपाल अविनाश पटेल पुत्र देवव्रत ने पुरंदरपुर थाने में तहरीर दी। तहरीर में बताया गया कि गाटा संख्या 190, रकबा 2.550 हेक्टेयर भूमि सरकारी खतौनी में बंजर श्रेणी में दर्ज है, जिस पर वीरेंद्र, राजाराम, सलीम, नौशाद और समशाद द्वारा अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण कराया जा रहा है।
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इसी प्रकार गाटा संख्या 520, रकबा 0.102 हेक्टेयर भूमि सरकारी अभिलेखों में नवीन परती श्रेणी में दर्ज है, जिस पर प्रद्युम्न और प्रमोद द्वारा अवैध रूप से मकान निर्माण किया जा रहा है। लेखपाल ने तहरीर में यह भी उल्लेख किया कि मना करने के बावजूद निर्माण कार्य लगातार जारी रखा गया।
लेखपाल की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुरंदरपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मु0अ0सं0 0838/26 के तहत सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 और 5 में कुल सात लोगों के नाम मुकदमा दर्ज किया जिसमें वीरेंद्र, राजाराम, सलीम, नौशाद, समशाद, प्रद्युम्न और प्रमोद शामिल है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और राजस्व अभिलेखों के साथ मौके की स्थिति का भी सत्यापन किया जाएगा। जांच के दौरान यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे के मामलों को लेकर शासन सख्त है और ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो सरकारी भूमि पर कब्जे की प्रवृत्ति और बढ़ सकती है।