नमाज पर पाबंदी के आदेश पर हाईकोर्ट सख्त, संभल के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को लगाई कड़ी फटकार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल की एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक आदेश को रद्द करते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की पीठ ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था संभालना प्रशासन का काम है, न कि धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 14 March 2026, 9:03 PM IST
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Prayagraj: रमजान के दौरान संभल में मस्जिद के भीतर नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक आदेश पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिआ और पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह विश्नोई को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन का कर्तव्य है, न कि धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना।

याचिका पर हुई सुनवाई

यह मामला उस समय अदालत पहुंचा जब संभल में एक मस्जिद के भीतर नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने का आदेश जारी किया गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए मुनासिर खान की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की द्विसदस्यीय पीठ ने की।

अदालत ने आदेश को किया निरस्त

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने प्रशासन द्वारा जारी उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने की बात कही गई थी। अदालत ने कहा कि धार्मिक गतिविधियों पर इस प्रकार की रोक लगाना उचित नहीं है और प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अन्य उपाय करने चाहिए।

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जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को कड़ी चेतावनी

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक अधिकारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ हैं तो उन्हें अपनी जिम्मेदारी पर पुनर्विचार करना चाहिए। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि यदि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक हालात को नियंत्रित नहीं कर सकते तो वे या तो अपने पद से इस्तीफा दें या फिर स्थानांतरण का अनुरोध करें।

प्रशासन की जिम्मेदारी पर अदालत की टिप्पणी

द्विसदस्यीय पीठ ने कहा कि किसी भी स्थिति में शांति और व्यवस्था बनाए रखना राज्य और प्रशासन की जिम्मेदारी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून का शासन कायम रखना अधिकारियों का दायित्व है और इससे बचने के लिए धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाना सही रास्ता नहीं है।

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फिलहाल उच्च न्यायालय की इस टिप्पणी के बाद संभल प्रशासन की कार्रवाई और पूरे मामले को लेकर राजनीतिक व प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

 

Location : 
  • Preayagraj News

Published : 
  • 14 March 2026, 9:03 PM IST

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