दरिंदगी की कीमत चुकानी पड़ेगी… पॉक्सो केस में कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा, क्या है पूरी कहानी?

गोरखपुर में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया, जिसने अपराधियों के लिए कड़ा संदेश दे दिया। करीब तीन साल पुराने केस में पुलिस की लगातार निगरानी और मजबूत पैरवी रंग लाई।

Gorakhpur: गोरखपुर जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वर्ष 2022 में दर्ज इस मामले में लंबी न्यायिक प्रक्रिया, पुलिस की लगातार निगरानी और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।

2022 में दर्ज हुआ था मामला

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में थाना रामगढ़ताल क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म का मामला सामने आया था। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 229/2022 दर्ज किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।

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जांच के दौरान पुलिस ने सभी जरूरी साक्ष्य जुटाए, पीड़िता और गवाहों के बयान दर्ज किए और वैज्ञानिक और दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई लगातार चलती रही।

ऑपरेशन कनविक्शन के तहत हुई लगातार मॉनिटरिंग

गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चल रहे ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत इस मुकदमे की विशेष निगरानी की गई। थाना रामगढ़ताल के पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने हर सुनवाई पर नजर रखी, जिससे मुकदमे की कार्रवाई में तेजी बनी रही। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मजबूत साक्ष्य और गवाह पेश किए। सभी तथ्यों और प्रमाणों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित होते हैं।

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दोषी को 20 साल की कठोर सजा

एएसजे/पॉक्सो-02 न्यायालय, गोरखपुर ने महुई सुधपुर निवासी सचिन निषाद, पुत्र प्रकाश निषाद को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी मानते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अदालत के इस फैसले को बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर सख्त संदेश माना जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में कानून के तहत कठोर कार्रवाई जरूरी है, ताकि समाज में अपराधियों के मन में कानून का भय बना रहे।

इस मुकदमे में विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) राममिलन सिंह की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। अदालत में उनकी प्रभावी दलीलों और सशक्त प्रस्तुति के चलते अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने में सफल रहा।

Location :  Gorakhpur

Published :  4 August 2026, 7:12 PM IST

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