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मंदिर से निकले नागराज
Gorakhpur: गोरखपुर के खजनी तहसील के सरया तिवारी गांव में स्थित प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर में शुक्रवार को एक ऐसी चमत्कारी घटना घटी, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। मंदिर की 90 डिसमिल जमीन को लेकर वर्षों से चला आ रहा स्वामित्व विवाद एक अलौकिक घटना के बाद पलभर में समाप्त हो गया। इस घटना ने मंदिर की पवित्रता को और बढ़ा दिया, साथ ही श्रद्धालुओं की आस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
विवाद का इतिहास और प्रशासनिक कार्यवाही
मंदिर की जमीन का स्वामित्व अभी तक देवभूमि के नाम दर्ज नहीं था, और कुछ लोग इसे अपनी संपत्ति बताकर कब्जा किए हुए थे। यह मामला संपूर्ण समाधान दिवस पर पहुंचने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। शुक्रवार को राजस्व टीम, जिसमें कानूनगो देवनारायण मिश्रा, लेखपाल राजू रंजन शर्मा और अन्य कर्मचारी शामिल थे, ने जमीन की पैमाइश शुरू की। चूना डालकर सीमा चिह्नित की गई और मंदिर के विकास के लिए जेसीबी से खुदाई शुरू हुई। लेकिन तभी कुछ स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
नागराज का चमत्कार
विरोध के बीच एक चमत्कारी दृश्य ने सबको स्तब्ध कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक एक विशालकाय, प्राचीन नागराज मंदिर के समीप प्रकट हुए। वे धीरे-धीरे चूना डाले गए निशान तक पहुंचे, मानो भूमि की सीमा की पुष्टि कर रहे हों। इसके बाद वे उसी रास्ते वापस लौटे और अचानक अदृश्य हो गए। इस दृश्य को देखकर विरोध करने वाले चुपचाप पीछे हट गए और निर्माण कार्य को सहमति दे दी। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि धरणीधर राम त्रिपाठी, बृजेश त्रिपाठी, गजेंद्र त्रिपाठी, शिवाकांत त्रिपाठी, लालमोहन गौड़, संतोष शर्मा, विजय यादव, सुदामा यादव और अमरेश राम त्रिपाठी समेत कई ग्रामीण इस अलौकिक घटना के साक्षी बने।
ग्रामीणों की आस्था और प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का मानना है कि यह महादेव और नागराज का संकेत था कि मंदिर का कार्य अब बिना रुकावट पूरा होगा। इस घटना के बाद मंदिर की जमीन पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। आसपास के गांवों में इस चमत्कार की चर्चा जोरों पर है। लोग इसे सदी का चमत्कार और नागराज का आशीर्वाद मान रहे हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है, “ऐसा दृश्य जीवन में पहली बार देखा। नागराज ने साबित कर दिया कि यह भूमि महादेव की है।” मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।
नीलकंठ महादेव मंदिर का इतिहास
गोरखपुर से 21 किलोमीटर दूर खजनी तहसील के सरया तिवारी गांव में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर एक प्राचीन शिव मंदिर है। मान्यता है कि यहां का शिवलिंग सैकड़ों वर्ष पुराना है और स्वयंभू (स्वयं प्रकट) है। इस कारण मंदिर में छत का निर्माण नहीं किया गया, क्योंकि यह झारखंडी शिव का रूप माना जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि मुगल काल में शासक मोहम्मद गजनबी ने दो बार इस शिवलिंग को कीमती पत्थर समझकर ले जाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा। उसने शिवलिंग पर उर्दू में एक पवित्र इस्लामी वाक्य लिखवाया, जिसे बाद में मौलवी ने अल्लाह का दर्जा देने वाला वाक्य बताया। वर्ष 1957 में मंदिर की बाउंड्री वॉल के लिए की गई खुदाई में मानव कंकाल मिले थे, जिसके बाद खुदाई रोक दी गई थी। यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
नीलकंठ महादेव मंदिर में नागराज के इस चमत्कार ने न केवल दशकों पुराने विवाद को समाप्त किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि आस्था और सत्य की जीत अंततः होती है। यह घटना मंदिर को और भी पवित्र बनाकर श्रद्धालुओं के लिए एक नया तीर्थ स्थल बन गई है।
Location : Gorakhpur
Published : 9 August 2025, 7:47 PM IST
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