Etawah News: अहंकार पर धर्म की जीत का संदेश… रामकथा में सूपनखा प्रसंग सुन झूमे श्रद्धालु

जसवंतनगर के नगला रामसुंदर में श्रीराम कथा महायज्ञ के दौरान सती अनुसुइया और सूपनखा प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 24 May 2026, 9:22 PM IST
google-preferred

Etawah: जसवंतनगर क्षेत्र के ग्राम नगला रामसुंदर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ के अष्टम दिवस पर भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में जैसे ही सती अनुसुइया के तप और सूपनखा प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन शुरू हुआ, पूरा वातावरण श्रद्धा और भावनाओं से सराबोर हो गया। श्रद्धालु कथा के हर शब्द में डूबते चले गए और कई स्थानों पर माहौल भावुकता से भर गया।

कथा पंडाल में गूंजा भक्ति और मर्यादा का संदेश

कथावाचक आचार्य शशिकांत रामायणी ने रामायण और पुराणों के प्रसंगों को अत्यंत सरल और भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन के दौरान घटित सती अनुसुइया और सूपनखा प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया, जिससे श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा सुनते समय पंडाल में मौजूद भक्तों ने कई बार भाव-विभोर होकर हाथ जोड़ लिए और वातावरण पूरी तरह धार्मिक ऊर्जा से भर गया।

Etawah News

रामकथा में सूपनखा प्रसंग सुन झूमे श्रद्धालु

सती अनुसुइया के तप का अद्भुत वर्णन

आचार्य शशिकांत रामायणी ने बताया कि जब भगवान श्रीराम वनवास के दौरान महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंचे तो वहां सती अनुसुइया ने माता सीता को पतिव्रत धर्म, त्याग और नारी शक्ति का दिव्य संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सती अनुसुइया का तप इतना महान था कि देवता भी उनके समक्ष नतमस्तक हो जाते थे। माता अनुसुइया ने माता सीता को दिव्य वस्त्र और आभूषण प्रदान कर उन्हें आदर्श गृहस्थ जीवन का आशीर्वाद दिया।\

इटावा में सवारियों से भरा ऑटो खाई में पलटा, फिर लगी भीषण आग; परीक्षा देने जा रहे तीन छात्र घायल

सूपनखा प्रसंग से मिला धर्म और मर्यादा का संदेश

कथा के दौरान आचार्य ने सूपनखा प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अहंकार, वासना और अधर्म का अंत निश्चित होता है और यह प्रसंग उसी का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि सूपनखा ने भगवान श्रीराम को मोहित करने का प्रयास किया, लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने धर्म और मर्यादा का पालन करते हुए उसे उचित मार्ग दिखाया। इसके बाद लक्ष्मण द्वारा सूपनखा की नाक काटे जाने की घटना को उन्होंने अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बताया।

महायज्ञ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़

नौ दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ में परीक्षित की भूमिका ठाकुर चंद्रवीर सिंह तोमर और राजेश्वरी देवी निभा रहे हैं। कथा स्थल पर रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।

इटावा में कार चोरी मामला: सपा नेत्री ने एसआई पर लगाया आरोप, जानिए पूरा मामला

आयोजन समिति की विशेष व्यवस्थाएं

आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। भक्तों के लिए बैठने, जलपान और अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया ताकि किसी को असुविधा न हो।

स्थानीय गणमान्य रहे मौजूद

इस अवसर पर विश्वनाथ तोमर, राजनरेश सिंह, मनोज तोमर, ब्रज बिहारी सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया।

Location :  Etawah

Published :  24 May 2026, 9:22 PM IST

Advertisement