सावधान! दूसरों की टेंशन अपने सिर लेना पड़ सकता है भारी, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये बड़ी गलती?

क्या दूसरों के दुख में ज्यादा दुखी होना आपको बीमार कर रहा है? इसे 'सेकंड हैंड स्ट्रेस' कहते हैं, जहां आप दूसरों का मानसिक तनाव खुद एब्जॉर्ब करने लगते हैं। जानिए इसके पीछे की असल वजह और कैसे खुद को 'ना' कहना सिखाकर आप इस बड़ी मुसीबत से बच सकते हैं।

Updated : 11 July 2026, 4:12 PM IST
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New Delhi: आज के समय में तनाव (स्ट्रेस) हमारी जिंदगी का एक ऐसा हिस्सा बन चुका है, मानो वह परिवार का ही कोई सदस्य हो। हम चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, इससे पूरी तरह पीछा छुड़ाना मुश्किल हो गया है। किसी को अपनी पढ़ाई की चिंता है, किसी को नौकरी की, तो कोई घर की समस्याओं से परेशान है। लेकिन क्या आपने कभी 'सेकंड हैंड स्ट्रेस' के बारे में सुना है? सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि चीजें तो सेकंड हैंड होती हैं, पर यह सेकंड हैंड स्ट्रेस क्या बला है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

क्या होता है 'सेकंड हैंड स्ट्रेस'?

आमतौर पर तनाव एक व्यक्तिगत समस्या है, जिसका समाधान इंसान को खुद ही निकालना पड़ता है। लेकिन इसके विपरीत, 'सेकंड हैंड स्ट्रेस' वह तनाव है जो हमें दूसरों से मिलता है। जब आप अपने आसपास रहने वाले लोगों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति को खुद के भीतर महसूस करने लगते हैं, तो इस स्थिति को सेकंड हैंड स्ट्रेस कहा जाता है।

उदाहरण के लिए, जब आपका कोई दोस्त अपनी परेशानी आपको बताता है, तो उसके प्रति आपके मन में गहरी सहानुभूति जागती है। धीरे-धीरे आप अपने काम छोड़कर चौबीसों घंटे उसी की समस्या के बारे में सोचने लगते हैं। दूसरों के दुख को इस हद तक अपना बना लेना ही सेकंड हैंड स्ट्रेस का कारण बनता है।

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क्यों शिकार होते हैं लोग इस तनाव का?

दूसरों के तनाव को अपने सिर लेने के पीछे कई मुख्य कारण होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

सहानुभूति और समानुभूति की अधिकता: जिन लोगों के भीतर दूसरों के प्रति दया, सहानुभूति और समानुभूति (दूसरों के दुख को पूरी तरह महसूस करना) की भावना बहुत ज्यादा होती है, वे अक्सर दूसरों की चिंताओं को देखकर जल्दी परेशान हो जाते हैं।

आसपास का माहौल: यदि आपके ऑफिस या घर का वातावरण लगातार तनाव से भरा रहता है, तो आप न चाहते हुए भी उसका शिकार हो जाते हैं। भले ही उस तनाव से आपका सीधा कोई लेना-देना न हो, लेकिन माहौल का असर आप पर पड़ ही जाता है।

करीबी रिश्ते: अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों की समस्याओं को सुनना कोई गलत बात नहीं है। लेकिन जब आप उनकी परेशानी को पूरी तरह अपनी परेशानी मानकर उनके बराबर ही तनाव लेने लगते हैं, तो यह आपके मानसिक तनाव को दोगुना कर देता है।

सोचने का नकारात्मक तरीका: कई बार हमारा सोचने-समझने का नजरिया नकारात्मक होता है। किसी भी तनावपूर्ण स्थिति को गलत तरीके से देखना या जरूरत से ज्यादा सोचना भी सेकंड हैंड स्ट्रेस को बुलावा देता है।

मुसीबत बनने से पहले ऐसे करें बचाव

दूसरों के दुख में दुखी होकर खुद को बीमार करने से बेहतर है कि आप कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें और इस तनाव से बचें:

खुद को दें प्राथमिकता (सेल्फ केयर)

मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए खुद से प्यार करना जरूरी है। जिंदगी में लोगों को उतनी ही प्राथमिकता और अहमियत दें, जितनी वो आपको देते हैं। इसके साथ ही अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए अच्छी डाइट लें, नियमित एक्सरसाइज करें और भरपूर नींद लें।

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'ना' कहना सीखें

हर समय हर किसी के लिए उपलब्ध रहना जरूरी नहीं है। अगर आपको कभी ऐसा महसूस हो कि आप मानसिक रूप से किसी की परेशानियां या नकारात्मक बातें सुनने की स्थिति में नहीं हैं, तो उन्हें शालीनता से 'ना' कह दें। इसमें कोई बुराई नहीं है।

अपनों की मदद लें

अगर आपको लगता है कि आप सेकंड हैंड स्ट्रेस के जाल में फंस चुके हैं और इससे बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तो इस स्थिति को पहचानें। अपने किसी बहुत करीबी और भरोसेमंद व्यक्ति से इस बारे में बात करें और उनकी मदद लेने में बिल्कुल न हिचकिचाएं। अपनी मानसिक सेहत को ठीक रखने के लिए ऐसा करना बेहद जरूरी है।

Location :  New Delhi

Published :  11 July 2026, 4:12 PM IST

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