मेरा बेटा वापस ला दो… हार्मुज हमले में नाविक की मौत के बाद फूटा परिवार का दर्द, डीएम-एसपी पहुंचे घर

देवरिया के एक परिवार की खुशियां उस दिन बिखर गईं, जब विदेश में काम कर रहे बेटे की मौत की खबर घर पहुंची। अब प्रशासन परिवार के संपर्क में है और बड़े स्तर पर कोशिशें जारी हैं। आखिर क्या हुआ था उस जहाज पर, जिसने एक परिवार की दुनिया बदल दी?

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 13 June 2026, 6:49 PM IST
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Deoria: देवरिया जिले के सुरौली गांव में उस समय भावुक माहौल देखने को मिला, जब जिला अधिकारी मधुसूदन हुल्गी और पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर मृतक नाविक शिवानंद चौरसिया के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंचे। हार्मुज क्षेत्र में एक शिपिंग जहाज पर हुए हमले में शिवानंद की मौत के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने परिवार को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी। इस दौरान परिजनों ने अपने दर्द और नाराजगी को खुलकर अधिकारियों के सामने रखा।

हार्मुज क्षेत्र में हमले के दौरान गई जान

जानकारी के अनुसार 9 जून को हार्मुज क्षेत्र के पास एक शिपिंग जहाज पर अमेरिका द्वारा की गई बमबारी और सैन्य कार्रवाई के दौरान देवरिया निवासी शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई थी। शिवानंद एक शिपिंग कंपनी में नाविक के रूप में कार्यरत थे और ओमान से भारत की ओर तेल लेकर आ रहे जहाज पर तैनात थे। घटना की सूचना मिलने के बाद से परिवार लगातार सदमे में है और गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।

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पार्थिव शरीर लाने के लिए सरकार कर रही प्रयास

जिलाधिकारी ने परिजनों को बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार, भारतीय दूतावास और ओमान स्थित संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। शिवानंद का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्च स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है और सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

परिवार ने उठाई मुआवजे और नौकरी की मांग

मृतक के परिजनों ने सरकार से एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। उनका कहना है कि शिवानंद परिवार के प्रमुख कमाने वाले सदस्य थे और उनकी असमय मौत से पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में आ गया है। परिवार का यह भी कहना है कि करीब छह महीने पहले ही लाखों रुपये का कर्ज लेकर शिवानंद को विदेश भेजा गया था, ताकि घर की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके।

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अमेरिका के खिलाफ दिखा गुस्सा

परिवार के सदस्यों में घटना को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने और अमेरिका के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। परिजनों का कहना है कि उनका बेटा रोजी-रोटी कमाने गया था, लेकिन अब वह कभी वापस नहीं लौटेगा। यही पीड़ा पूरे परिवार को अंदर तक झकझोर रही है।

Location :  Deoria

Published :  13 June 2026, 6:46 PM IST

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