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देवरिया के बरहज ब्लॉक स्थित ग्राम सभा बरांव का एक दलित टोला आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। सड़क, शौचालय, आवास, पानी और पेंशन जैसी योजनाएं यहां सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों ने बताई परेशानी
Deoria: देवरिया जनपद के बरहज ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा बरांव का एक हिस्सा आज भी विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह कटा हुआ है। कागज़ों में भले ही योजनाएं चल रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
डाइनामाइट न्यूज़ की टीम जब मौके पर पहुंची, तो वहां दर्जनों ग्रामीण अपनी पीड़ा और उपेक्षा की दास्तां सुनाने को मजबूर दिखाई दिए।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1998 की विनाशकारी बाढ़ में यह पूरा इलाका जलमग्न हो गया था। उस समय तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर पीड़ित, शोषित और वंचित परिवारों को प्रशासन द्वारा इस स्थान पर बसाया गया था। तभी से करीब 65 से 70 परिवार, जिनमें अधिकांश अनुसूचित जाति के लोग हैं, यहां जीवन यापन कर रहे हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि विस्थापन के बाद आज तक इस टोले के लिए कोई ठोस विकास योजना लागू नहीं की गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत स्तर से लेकर तमाम जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन किसी ने भी इस टोले की सुध नहीं ली। चुनाव के समय वादों और आश्वासनों के जरिए वोट ले लिए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनप्रतिनिधि इस बस्ती का रुख तक नहीं करते। नतीजतन, यह इलाका लगातार उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि उनके घरों तक आने-जाने का यही एकमात्र मुख्य मार्ग है, जो आज भी कच्चा और बदहाल स्थिति में है। बरसात के दिनों में सड़क पर पानी भर जाता है, जिससे बहू-बेटियों और बुजुर्गों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार मजबूरी में लोग कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरने को विवश होते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस टोले में एक भी सार्वजनिक शौचालय या इज्जत घर नहीं है। महिलाओं और बेटियों को मजबूरी में खेतों की ओर जाना पड़ता है। इसके अलावा सरकारी आवास, हर घर जल योजना, पथ प्रकाश, पक्की नाली, इंटरलॉकिंग सड़क, आरसीसी निर्माण, मवेशियों के लिए टीन शेड, विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन और विकलांग पेंशन जैसी योजनाओं से भी वे पूरी तरह वंचित हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार जिला मुख्यालय और तहसील मुख्यालय तक अपनी फरियाद लेकर गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। आज तक उनकी समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनके टोले को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए और बुनियादी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।