देवरिया में बड़ा बवाल: अधिवक्ता की मौत के बाद SDM सस्पेंड, जांच तेज

देवरिया में जमीन विवाद के दौरान हुई एक घटना ने बड़ा मोड़ ले लिया है। एक अधिवक्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। मामले में जांच रिपोर्ट के बाद सरकार ने कदम उठाया है, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं और जांच जारी है।

Updated : 11 April 2026, 9:54 AM IST
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Deoria: जिले में अधिवक्ता विजेंद्र सिंह की मौत के मामले में प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बरहज के एसडीएम विपिन कुमार द्विवेदी को निलंबित कर दिया है। शासन ने प्रथमदृष्टया जांच में लापरवाही मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए हैं। इस घटना के बाद प्रशासनिक महकमे और अधिवक्ता समुदाय में हलचल मची हुई है।

मामले की पृष्ठभूमि: जमीन विवाद से शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला बरहज तहसील के ग्राम लक्ष्मीपुर का है, जहां राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाली और नलकूप की जमीन पर पक्की सड़क निर्माण को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद के निपटारे के लिए जमीन की पैमाइश की जा रही थी। इसी दौरान मौके पर मौजूद एसडीएम और अधिवक्ता विजेंद्र सिंह के बीच तीखी बहस हो गई, जो आगे चलकर गंभीर घटना में बदल गई।

कैसे हुई अधिवक्ता की मौत?

परिजनों के अनुसार, पैमाइश के दौरान हुए विवाद में एसडीएम द्वारा अधिवक्ता को फटकार लगाई गई और कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। इस घटना से विजेंद्र सिंह मानसिक रूप से आहत हो गए और उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।

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परिजनों का विरोध और गंभीर आरोप

घटना के बाद मृतक के परिजनों ने शव को तहसील परिसर में रखकर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने एसडीएम को सीधे तौर पर मौत का जिम्मेदार ठहराया और निष्पक्ष जांच के साथ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मृतक के बेटे सिद्धार्थ सिंह ने आरोप लगाया कि एसडीएम के व्यवहार ने उनके पिता को गहरा मानसिक आघात पहुंचाया, जिससे उनकी जान चली गई।

अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश

इस घटना के बाद स्थानीय अधिवक्ता समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिला। अधिवक्ता उदय राज चौरसिया समेत कई वकीलों ने इसे प्रशासनिक दबाव और अनुचित व्यवहार का मामला बताया। तहसील परिसर में नारेबाजी की गई और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई। वकीलों ने इस घटना को न्याय व्यवस्था पर हमला बताया।

जांच समिति की रिपोर्ट में एसडीएम की भूमिका संदिग्ध

घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। इस समिति में अपर आयुक्त प्रशासन गोरखपुर, पुलिस अधीक्षक नगर गोरखपुर और अपर जिलाधिकारी नगर गोरखपुर शामिल थे। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में एसडीएम की भूमिका को प्रथमदृष्टया संदिग्ध माना और उन्हें लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया।

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सरकार की कार्रवाई: निलंबन और विभागीय जांच

जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने एसडीएम विपिन कुमार द्विवेदी को निलंबित कर दिया। साथ ही नियम-7 के तहत उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। इस जांच के लिए प्रयागराज मंडल के कमिश्नर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया है।

पुलिस कार्रवाई और आगे की स्थिति

इस मामले में बरहज थाने में ग्राम प्रधान सहित पांच नामजद और सात अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल रहा, हालांकि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में होने का दावा किया है।

Location :  Deoria

Published :  11 April 2026, 9:54 AM IST

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