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म्यूल अकाउंट के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी! देवरिया पुलिस ने एक ऐसी फर्जी सॉफ्टवेयर कंपनी का खुलासा किया है जिसके तार देशभर के साइबर अपराधों से जुड़े हैं। पुलिस की इस बड़ी सफलता और ठगी के नए तरीकों के बारे में विस्तार से जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर…
अनिल कुमार पाण्डेय (अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी देवरिया) ने पूरे मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की (Source: Dynamite)
Deoria: उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद से साइबर अपराध का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहाँ पुलिस की विशेष टीम ने 'म्यूल अकाउंट' के माध्यम से करोड़ों रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है।
अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी आनन्द कुमार पाण्डेय के कुशल निर्देशन में की गई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बरहज थाना क्षेत्र के बेलडाड मोड़ से मुख्य आरोपी माखन लाल गुप्ता को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। आरोपी मूल रूप से जयनगर वार्ड नंबर-4 का निवासी है और लंबे समय से डिजिटल जालसाजी के इस खेल में सक्रिय था।
पुलिस द्वारा की गई गहन पूछताछ और तकनीकी जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि आरोपी ने “लैक्सीरुफ सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड” के नाम से एक फर्जी कंपनी रजिस्टर्ड कराई थी। इस कागजी कंपनी की आड़ में आरोपी ने विभिन्न बैंकों में कई खाते संचालित किए थे जिनका वास्तविक उद्देश्य देशभर में हो रही साइबर ठगी की रकम को सुरक्षित तरीके से इधर-उधर करना था।
जांच के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि इस नेटवर्क से जुड़े कुल 9 बैंक खातों का संचालन किया जा रहा था जिन पर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर पहले से ही 46 गंभीर शिकायतें दर्ज हैं। अब तक की पड़ताल में इन खातों के माध्यम से लगभग 60 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का विवरण मिला है।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से अपराध में प्रयुक्त होने वाली भारी सामग्री बरामद की है जिसमें 11 चेकबुक, 9 एटीएम कार्ड, विभिन्न बैंकों की पासबुक और आधार कार्ड शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पुलिस ने कंपनी के फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन दस्तावेज, एपीआई एग्रीमेंट के कागजात के साथ-साथ एक महंगा एप्पल मोबाइल फोन और दो डेल कंपनी के लैपटॉप भी जब्त किए हैं। इन डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य नामों के खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।
वर्तमान में थाना साइबर क्राइम देवरिया में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है और पुलिस की टीमें फरार चल रहे अन्य आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
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इस बड़ी कार्रवाई के बाद साइबर क्राइम टीम ने आम नागरिकों को जागरूक करते हुए विशेष अपील जारी की है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि लोग अपने बैंक विवरण, ओटीपी या किसी भी प्रकार की गोपनीय जानकारी अपरिचित व्यक्तियों के साथ साझा न करें क्योंकि अपराधी अक्सर 'म्यूल अकाउंट' बनाने के लिए सामान्य लोगों के खातों का लालच देकर इस्तेमाल करते हैं।
किसी भी प्रकार के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन या ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होने की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देने का परामर्श दिया गया है ताकि समय रहते अपराधियों पर नकेल कसी जा सके।