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आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के फैसले के बाद पहला बयान सामने आया है। उन्होंने अपनी खामोशी को ‘सैलाब’ आने की चेतावनी बताई है। राघव चड्ढा ने अपनो ऑफिशियल पेस पर वीडियो शेयर करते हुए अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है।
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Source: Google)
New Delhi: आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में पार्टी के 'डिप्टी लीडर' पद से हटाए जाने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। लंबे समय की चुप्पी तोड़ते हुए राघव चड्ढा ने अपनी ही पार्टी के फैसले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि संसद में आम जनता के जरूरी मुद्दे उठाने की सजा उन्हें इस कार्रवाई के रूप में मिली है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके इस बयान के बाद हलचल तेज हो गई है।
राघव चड्ढा ने अपने आधिकारिक बयान में भावुक होते हुए पूछा कि क्या संसद में देश के आम आदमी की समस्याओं को रखना कोई अपराध है? उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें सदन में बोलने का अवसर मिला, उन्होंने उन विषयों को प्राथमिकता दी जो सीधे तौर पर जनता से जुड़े थे। सांसद ने सवाल उठाया कि क्या सार्वजनिक हितों पर बात करना कोई गुनाह है जिसके लिए उनके खिलाफ इस तरह का एक्शन लिया गया। उन्होंने सीधे तौर पर अपनी पार्टी नेतृत्व की मंशा पर उंगली उठाते हुए कहा कि उन्हें चुप कराने की कोशिश की जा रही है।
'AAP' पर राघव चड्ढा हुए आंख बबूला, वायरल वीडियो ने लाया भूचाल @raghav_chadha #RaghavChadha #viralvideo #AAP #Parliament #Kejriwal pic.twitter.com/ue2pXdE489
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) April 3, 2026
अपनी बात को विस्तार देते हुए राघव चड्ढा ने उन मुद्दों को गिनाया जो उन्होंने हाल के दिनों में राज्यसभा में उठाए थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने एयरपोर्ट पर मिलने वाले महंगे खाने से लेकर जोमैटो और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स के डिलीवरी राइडर्स की परेशानियों तक की आवाज बुलंद की थी। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों में मिलावट जैसे गंभीर विषयों पर भी उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। चड्ढा का कहना है कि इन मुद्दों से देश की आम जनता को तो लाभ हुआ, लेकिन यह समझ से परे है कि इससे आम आदमी पार्टी को क्या नुकसान पहुंचा जो उन्होंने राज्यसभा सचिवालय को लिखकर उनकी बोलने की शक्ति सीमित करने की कोशिश की।
अपने संबोधन के अंत में राघव चड्ढा ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जिन लोगों ने आज संसद में उनके बोलने का अधिकार छीनने का प्रयास किया है, वे इसे उनकी कमजोरी न समझें। उन्होंने एक शायराना अंदाज में विरोधियों को संदेश देते हुए कहा कि उनकी खामोशी को हार समझना बड़ी भूल होगी। चड्ढा ने खुद की तुलना एक ऐसे दरिया से की जो वक्त आने पर सैलाब बनने की ताकत रखता है। उनके इस तेवर से साफ है कि आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और बढ़ सकती है।