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सोनभद्र में MBBS एडमिशन का ऐसा मामला सामने आया, जिसने सबको चौंका दिया। छात्रों और अभिभावकों को झांसा देकर लाखों की रकम वसूली गई। साइबर क्राइम पुलिस जांच में जुटी है और कई नए पहलुओं का खुलासा होने वाला है। पूरा सच जानकर हर कोई दंग रह जाएगा।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी (Img: Dynamite News)
Sonbhadra: सोनभद्र जनपद में MBBS एडमिशन के नाम पर छात्रों और अभिभावकों को ठगने का सनसनीखेज मामला सामने आया। साइबर क्राइम पुलिस ने इस संगठित गिरोह का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह छात्रों और उनके परिवारों को मेडिकल कॉलेजों में पक्की सीट दिलाने का झांसा देकर उनसे भारी रकम वसूलता था।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने उसे नीट के माध्यम से MBBS में प्रवेश दिलाने का भरोसा दिलाया और खुद को प्रभावशाली एजेंट बताया।
आरोपियों ने विभिन्न चरणों में कुल 22 लाख रुपये अपने बताए गए बैंक खातों और ऑनलाइन माध्यमों से जमा करवा लिए।
शिकायत के आधार पर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर क्राइम टीम सक्रिय हुई। टीम ने अभियुक्तों के बैंक खातों का विश्लेषण किया, मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल्स जांची और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए डिजिटल साक्ष्य जुटाए। इसके बाद सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से लखनऊ के चारबाग बस स्टैंड के पास दबिश देकर तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया।
सोनभद्र में MBBS एडमिशन का बड़ा घोटाला!
नीट/एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर 22 लाख की ठगी, साइबर क्राइम पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया। @Uppolice @sonbhadrapolice #CyberCrime #MBBSAdmission #NEETFraud #SonbhadraNews pic.twitter.com/9D1QnH43SD
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) April 3, 2026
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे कोचिंग संस्थानों और अन्य माध्यमों से छात्रों का डेटा प्राप्त करते थे। फिर ‘ऑप्टिमस एजुकेशन कंसल्टेंसी’ के नाम से संचालित अपने कार्यालय में कॉल सेंटर के जरिए ऐसे छात्रों से संपर्क करते थे, जो नीट परीक्षा पास करने के बावजूद दाखिले से वंचित रह जाते थे। उन्हें मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर ठगी की जाती थी।
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पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया है और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस घटना को लेकर चिंता और गुस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के गिरोह अक्सर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कोचिंग नेटवर्क के माध्यम से छात्रों को फंसाते हैं।
डिजिटल साक्ष्य और बैंक ट्रांजैक्शन से यह साफ हो गया कि गिरोह ने लंबे समय से इस तरह की ठगी की योजना बनाई थी। साइबर क्राइम टीम ने चेतावनी दी है कि छात्र और अभिभावक किसी भी एजेंट या कंसल्टेंसी से संपर्क करने से पहले पूरी तरह जांच कर लें।